अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले कुछ दिनों में कश्मीर घाटी में एक बार फिर से सिनेमा की वापसी हो सकती है.जी हां कश्मीर के एक बिजनेसमैन विजय धर ने एक बार फिर से घाटी में सिनेमा की वापसी कराने की ठानी है.दरअसल इस्लामिक अलगाववादियों के विरोध के बाद बीते 30 सालों से कश्मीर में सिनेमाघर बंद चल रहे हैं.1989 में अल्लाह टाइगर नाम के आंतकी संगठन ने सिनेमा को गैर इस्लामिक बताते हुए धमकी देना शुरू कर दिया था जिसके बाद वहां सिनेमाघर बंद हो गए.

धर ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से बात करते हुए कहा,"मैं चाहता हूं की बाकी भारत की तरह कश्मीर के युवा भी मनोरंजन का आनंद लें.अगर कोई सिनेमा देखना पसंद नहीं करता तो ठीक है वो न आए.लेकिन जो देखना चाहते हैं कम से कम हम उन्हें बेसिक सुख सुविधा दे सकते हैं."

कश्मीर में एक जमाने में 24 सिनेमाघर हुआ करते थे.पैलेडियम,रीगल जैसे इनके नाम थे.विजय धर भी ऐसे ही एक सिनेमाघर ब्रॉडवे के मालिक थे,लेकिन 1990 में ये सभी बंद हो गए.कश्मीरियों का मानना था की ये हालात अभी के लिए हैं लेकिन बाद में ये सभी हमेशा के लिए बंद हो गए.1996 में सरकार से सुरक्षा मिलने के आश्वासन के बाद तीन सिनेमाघर खुले भी लेकिन आतंकियों के उन्माद के सामने ये बंद हो गए.

भारत सरकार के मुताबिक कश्मीर में संघर्ष में 40 हजार लोगों की मौत चुकी है.इसके बावजूद अपने प्राकृतिक सौंदर्य के कारण कश्मीर भारतीय फिल्म निर्देशकों के लिए शूटिंग की पसंदीदा जगह बनी रही.लेकिन ये एक विडंबना है की कश्मीर के लोग अपने ही 'स्वर्ग' की खूबसूरती को बड़े पर्दे पर नहीं देख पाते.भले ही कश्मीर में स्कूल चलाने वाले धर सिनेमाघर खोलने को लेकर उत्साहित हैं लेकिन कश्मीर के लोग इससे ज्यादा उत्साहित नहीं हैं.ऐसे ही एक कश्मीरी नागरिक नवाज बट्ट कहते हैं,"मैं फिल्म देखना पसंद करूंगा लेकिन मैं इसे लेकर नर्वस हूं.ये विचार अच्छा नहीं है क्योंकि कश्मीर की हालत भी अच्छी नहीं है."

हालांकि महीने में एक बार फिल्म देखने के लिए दिल्ली आने वाले विजय धर अपने निर्णय पर अड़े हैं.दरअसल कश्मीरी अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी आज भी सिनेमाघर खोलने का विरोध करता है.इस बारे में जब धर से सवाल पूछा गया तो उनका जवाब था, "अगर हम नकारात्मकता के साथ ही शुरूआत करेंगे तो जिदंगी में किसी काम के लिए प्रयास ही नहीं करेंगे."