जम्मू कश्मीर में आतंक पर सेना का कड़ा प्रहार जारी है और लगातार सेना इन आतंकियों को 72 हूरों के पास पहुंचाने में मदद कर रही है.आपको बता दें की बीते साल यानि 2018 में सुरक्षा बलों ने जम्मू कश्मीर में 311 आतंकियों को जन्नत की राह दिखाई.आपको बता दें की बीते एक दशक में राज्य में मारे जाने वाले आतंकियों की ये सबसे बड़ी तादाद है.इससे पहले 2010 में 232 आतंकी ढेर हुए थे.

गृह मंत्रालय के आकंड़ों के मुताबिक, राज्य में बीते 3 सालों में आतंकी वारदात में भी लगातार इजाफा हुआ है.2016 में जम्मू कश्मीर में आतंक की 322 घटनाएं हुईं थीं,2017 में 342 घटनाएं हुईं.वहीं 2018 में आतंक की 429 वारदातें हुईं.इस तरह हम देख सकते हैं की लगातार आतंकी वारदातों में भी घाटी में इजाफा हुआ जो की चिंता की बात है.आतंकी घटनाओं में नागरिकों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है और 2017 में जहां 40 नागरिक मारे गए थे वहीं 2018 में 77 नागरिक मारे गए.अगर बात जवानों की शहादत की करें तो 2017 और 2018 दोनों में 80-80 जवानों ने देश के लिए अपनी कुर्बानी दी है.

दिसंबर के पहले हफ्ते तक 223 आतंकी मारे गए थे यानी पिछले 3 हफ्तों में ही 88 आतंकी को सेना ने मार गिराया है। दिसंबर के पहले हफ्ते तक मारे गए कुल आतंकियों में पाकिस्तान से आए आतंकी शामिल थे। 15 सितंबर को राज्य में निकाय और पंचायत चुनाव के ऐलान के बाद से अगले 80 दिनों में ही 81 आतंकी मारे गए। वहीं, 25 जून से लेकर 14 सितंबर के बीच 51 आतंकी ढेर किए गए

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब सुरक्षाबलों और सरकार के सामने चुनौती स्थानीय नागरिकों को आतंकी बनने से रोकने की है.रिपोर्ट के मुताबिक हिज्बुल मुजाहिदीन और पाकिस्तानी आतंकी संगठन स्थानीय नागरिकों को सेना में भर्ती कर रहे हैं और कई नागरिकों की भर्ती के कई मामले हाल में सामने आए हैं.रिपोर्ट के मुताबिक घाटी में अभी 250-300 आतंकी सक्रिय हो सकते हैं.