2017 में उत्तरी दिल्ली का कादीपुर गांव राजधानी दिल्ली का पहला गांव बन गया जिसे फ्री वाई फाई की सुविधा मिली.इस गांव को दिल्ली बीजेपी के प्रमुख और सांसद मनोज तिवारी ने गोद लिया था.लेकिन ये गांव आज भी साफ पानी,स्वास्थ्य सुविधाओं और कूड़े के सही निस्तारण न कर पाने की समस्याओं से जूझ रहा है.

अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक मनोज तिवारी के गोद लेने के बाद से गांव में पक्की सड़क बनी हैं.एलईडी स्ट्रीटलाइट लगाई गईं.हालांकि पानी की समस्या से गांव को निजात नहीं मिली.पानी के हालात गांव में ये है की हर दूसरे दिन सुबह 4 बजे से 8 बजे तक पानी आता है.गांव में रहने वाली एक महिला बिमला देवी कहती हैं की सरकार को इंटरनेट और एलईडी लाइट के बजाय पानी की समस्या को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए.वो कहती हैं की उनके घर में किसी एक को सुबह 4 बजे पानी भरने के लिए उठना पड़ता है.उन्होंने कहा,"हम पानी को सोने की तरह इस्तेमाल करते हैं.गांव में इंटरनेट है लेकिन पानी की सही व्यवस्था नहीं है.सड़कें एलईडी लाइटों से भरी पड़ी हैं लेकिन पानी की समस्या का क्या किया जाए ?"

गांव के एक छात्र अखिल के मुताबिक फ्री वाई फाई से छात्रों को पढ़ाई में सुविधा मिली है.इसके जरिए अब वो ऑनलाइन नोट्स भी पढ़ पाते हैं.हालांकि अभी गांव में वाई-फाई नहीं चल रहा है.लोकल बीजेपी पार्षद उर्मिला राणा बताती हैं कि बच्चों के माता पिता ने बोर्ड परीक्षाओं तक के लिए वाई फाई को बंद करने की अपील की थी.अभिवावकों का कहना था कि बच्चे इंटरनेट पर ज्याजा वक्त बिता रहे हैं इसलिए बोर्ड परीक्षाओं तक के लिए इसे बंद किया जाए.उर्मिला के अनुसार अगले हफ्ते से वाई फाई को दोबारा शुरू कर दिया जाएगा.

कादीपुर के गांव के साथ ही कुशक -1 और कुशक-2 गांव जुड़े हुए हैं.इन दोनों गांवों में 14 हजार मतदाता हैं.हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक बीते साल यहां डेंगू के 100 मामले सामने आए.गांव में अभी तक कोई अस्पताल नहीं है.गांव के लोगों का कहना है की ज्यादा परेशानी होने पर उन्हें जहांगीर पुरी में इलाज के लिए जाना पड़ता है.गांव की एक निवासी सीमा कुमारी कहती हैं,"गांव में कुछ डॉक्टर हैं लेकिन उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता.दरअसल ये झोलाछाप हैं."

गांव को गोद लेने वाले सांसद मनोज तिवारी इन समस्याओं के लिए दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं.मनोज तिवारी कहते हैं, "हमने गांव में विकास के काफी काम करवाए हैं.मैंने गांव के विकास के लिए 1.5 करोड़ रूपये खर्च किए हैं.हम गांव में पानी की नियमित सप्लाई,अस्पताल और कूड़ाघर के लिए प्रयास करते रहे हैं.दिल्ली सरकार के असहयोगपूर्ण रवैए की वजह से ऐसा करना मुश्किल हो रहा है.इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हुए कामों के लिए हमें जमीन की जरूरत होगी और वो दिल्ली सरकार के अंतर्गत आती है.बीते साल हमें जमीन मिली भी थी और हमने वहां गांव वालों के लिए पार्क बनवाया.लोग वहां जाते भी हैं."