आखिरकार काफी दिनों की मशक्कत के बाद भारत के कथित किसान आंदोलन को दुनिया के पटल पर ले जाने में एक लॉबी कामयाब हो गई. पॉप स्टार रिहाना से इसकी शुरुआत हुई. इसके बाद जन्मजात प्रकृति पुत्री ग्रेटा थेनबर्ग और हॉलीवुड की एक्ट्रेस अमांडा और पूर्व पॉर्न स्टार मिया खलीफा ने भी ट्वीट कर भारत के किसानों के साथ खड़े होने की बात कही. इनके ट्वीट के बाद अक्षय कुमार, अजय देवगन और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने भारत की संप्रुभता की बात कहते हुए, किसान आंदोलन पर बाहरी दखल से नाराजगी जताई.

इसके बाद वो हुआ जिसके खिलाफ हमेशा खड़े होने की बात भारत का लिबरल वर्ग करता है. सचिन तेंदुलकर को बिका हुआ बताया गया. उन्हें स्पाइन लेस यानि रीढ़विहीन कहा गया. ऐसे ही बाकी लोगों के बारे में भी टिप्पणियां की गईं. चूंकि तेंदुलकर अभी तक राजनीति से बाहर रहते थे इसलिए उन्हें ज्यादा निशाना बनाया गया कि उन्होंने अपना ईमान बेच दिया. भारतीयों लिबरलों के अपनी इस सोच का नग्न प्रदर्शन करने के दौरान ही, प्रकृति पुत्री ग्रेटा थेनबर्ग से एक गलती हो गई. उन्होंने एक 'टूलकिट' ट्वीट कर दी. इस टूलकिट में पूरी जानकारी थी कि किस तरह से सोशल मीडिया के जरिए भारत सरकार पर धावा बोलना है. इसके लिए किन किन लोगों को फॉलो करना है. सबसे बड़ी बात थी कि इसमें रिहाना और मिया खलीफा के बारे में भी जानकारी थी और यहां तक लिखा था कि रिहाना क्या ट्वीट करेंगी. एक एक तारीख के मुताबिक बनाए गए इस प्लान में भारत सरकार पर हल्ला बोलने की पूरी तैयारी थी. कुछ न्यूज रिपोर्ट्स की मानें तो यह टूलकिट खालिस्तान समर्थकों आतंकवादियों की तरफ से बनाई गई है. खैर ग्रेटा को उनकी इस ग्रेट गलती का अंदाजा जल्द ही हो गया और उन्होंने यह ट्वीट डिलीट कर दिया.

ग्रेटा के ट्वीट के बाद इस डाक्यूमेंट में एडिटिंग चालू हो गई और इसमें तमाम बदलाव किए गए, लेकिन तब तक पोल खुल चुकी थी. इस खबर के फैलने के साथ ही ग्रेटा थेनबर्ग समेत सभी विदेशियों पर सोशल मीडिया पर हल्ला बोल दिया गया लेकिन एक नई सुबह के साथ भारत का लिबरल वर्ग बेशर्मी की एक और चादर ओढ़कर उठा. वो तमाम डाक्यूमेंट नजरअंदाज कर दिए गए और तेंदुलकर समेत सभी वो भारतीय स्टार जिन्होंने भारत की संप्रुभता के लिए ट्वीट किया उन्हें बिका हुआ बताया गया.

जिस तरह से तेंदुलकर समेत सभी स्टार ने ट्वीट किया उसे देखकर लगता है कि शायद कहीं उन्हें कोई संदेश मिला हो. क्योंकि ये सिलसिला अचानक से शुरू हुआ लेकिन जरा सोचिए जो मैसेज युवराज सिंह को भेजा गया होगा क्या वो हरभजन सिंह को नहीं भेजा गया होगा? जो मैसेज तेंदुलकर को भेजा गया होगा क्या वो लक्ष्मण को नहीं भेजा गया होगा. आखिर क्या कारण है कि युवराज ने ट्वीट किया लेकिन हरभजन सिंह ने नहीं या तेंदुलकर ने ट्वीट किया लेकिन लक्ष्मण ने नहीं. दरअसल मुझे लगता है कि सभी खिलाड़ियों से एक अपील की गई होगी, जिसे कुछ लोगों ने माना और ट्वीट किया, जिनकी इच्छा नहीं होगी, उन्होंने नहीं किया. इरफान पठान जैसे कुछ खिलाड़ी ऐसे भी थे जिन्होंने खिलाफ ट्वीट भी किए. भारत सरकार ने उनके साथ कोई दुर्व्यवहर तो नहीं कर दिया. बाकी सम्मान या पैसे की बात, तेंदुलकर के सामने करना बेईमानी होगी. वो इन सब चीजों से ऊपर हैं.

इस सबमें भारतीय लिबरल वर्ग खुलकर एक्सपोज हुआ है. किस तरह से ये लोग विदेशियों के एक योजनाबद्ध तरीके से ट्वीट करने पर उनका समर्थन करते हैं लेकिन तेंदुलकर और लता मंगेशकर तक पर सवाल उठाते हैं और उन्हें बिका हुआ बताते हैं. ये सिर्फ इसलिए किया जाता है क्योंकि तेंदुलकर या लता मंगेशकर वो नहीं बोलते जो ये लोग सुनना चाहते हैं. इस पूरे ड्रामे में एक बात साफ हो चुकी है कि किसानों के इस आंदोलन को अब जल्द से जल्द खत्म कराने की जरूरत है. वर्ना इसी तरह प्रोपैगंडा रचे जाएंगे और भारत को कमजोर करने की साजिश होगी.