भारतीय रेलवे कई बार रेलगाड़ियों की लेट लतीफी या रेल यात्रा के दौरान होनी वाली असुविधाओं के लिए जाना जाता है। पिछले कुछ सालों से रेलवे आधुनिकरण की तरफ बढ़ रहा है हालांकि आधुनिकरण की चाल सुस्त है। फिर भी तेजस जैसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन भारतीय रेल के नये युग को बयां करती है। पर कहते है की ताली एक हाथ से नहीं बजती, सरकारें अपनी तरफ से कोशिश कर रही है और पिछले 10 सालों में रेलवे में काफी सुधार भी हुआ है। सरकारों का अपना काम करने का एक तरीका होता है जो कछुए की चाल से चलता रहता है, पर भारतीय रेल यात्रियों का व्यवहार भी अपनी तरह का दुनिया में अनूठा ही है। यात्रा के दौरान शराब पीना, गुटका खा के रेलवे स्टेशन से लेकर ट्रेन के भीतर या बाहर जंहा मर्जी आये वंहा थूक देना, सीट कन्फर्म न होने पर खुद से आगे बढ़ के टीटी को घूस देना और जब यात्रा ख़त्म हो जाये तो ट्रेन के तकिये, तौलिये, बेडशीट, कम्बल ले के चम्पत हो जाना। यंहा तक की शौचालय के मग, नल की टोंटी, शीशे इत्यादि चुराने में भी लोग संकोच नहीं करते।

सबसे चौकाने वाला सच ये है की अगर लोग सोच रहे है की चोरी करने में जनरल क्लास और स्लीपर क्लास के लोग ही शामिल होते होंगे तो वो गलत है, वातानुकूलित क्लास के यात्री भी इसमें पीछे नहीं है। कुछ दिनों पहले रतलाम स्टेशन पर वातानुकूलित क्लास के यात्री को उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वह 6 बेडशीट्स, 3 तकिये और 3 कम्बल चुरा के ले जाने की कोशिश में था।

मुंबई मिरर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल के दौरान लम्बी दूरी की ट्रेन यात्रा के दौरान जो कुल सामान चुराए गए उनमे 1.95 लाख तौलिये, 81,736 बेडशीट्स, 55,573 तकिये कवर, 5038 तकिये, 7043 कम्बल शामिल है।

इस साल अप्रैल से सितम्बर के बीच चुराए गए सामान में 79,350 तौलिये 27,545 बेडशीट्स, 21,050 तकिये कवर, 2150 तकिये और 2065 कम्बल शामिल है। सुनील उदासी, मुख्य प्रवक्ता, सेंट्रल रेलवे, बताते है की एक बेडसीट की कीमत 132 रुपया, तौलिया 22 रुपया और तकिये की कीमत 25 रुपया पड़ती है। पिछले 3 सालों में रेलवे को लगभग 4000 करोड़ का नुकसान हुआ है और चोरी उसमे मुख्य कारण है।

अभी हाल ही में तेजस ट्रेन से टोटी और वाश बेसिन चुराने और एलइडी टीवी में तोड़ फोड़ करने की न्यूज़ शायद आपने सुनी ही होगी। एक तरफ आप सुविधाओं का रोना रोते है और दूसरे तरफ आप मिलने वाली हर सुविधा को या तो चुरा के घर ले जाना चाहते है या ऐसा कर देना चाहते है की दूसरा कोई इस्तेमाल ही न कर सकें।