उत्तर प्रदेश के जिला कन्नौज के रहने वाले 30 वर्षीय गोपाल बाबू शुक्ला भारतीय सेना में लांस नायक पद पर थे। चीन के साथ चल रहे तनाव में उनकी तैनाती लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर थी।

लांस नायक गोपाल बाबू कैसे शहीद हुए इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी गयी है। परिवार के सदस्यों का कहना है की उन्हें गोपाल के कमांडिंग अफसर का फ़ोन आया था और उन्होंने बस इतना बताया की गोपाल सीमा पर शहीद हो गए है।

लद्दाख से पहले गोपाल बाबू की पोस्टिंग सियाचिन में थी और चीन के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए उन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात किया गया था। शहीद होने के ठीक दो दिन पहले गोपाल ने अपने घर वालों से वीडियो कॉल के जरिये बात की थी। उस समय वो बर्फीले इलाके में गश्त कर रहे थे।

परिवार वालों के अनुसार गोपाल इजराइल से 7 माह की ट्रेनिंग लेकर आये थे उसके बाद उनकी तैनाती सियाचिन में की गयी थी। शहीद गोपाल बाबू के परिवार में पत्नी और एक साल की बच्ची, माता पिता और दो भाई है।

उनका विवाह 3 साल पहले ही हुआ था। उनके पिता और ससुर का कहना है की उन्हें गोपाल की शहादत पर गर्व है। देश के लिए उन्होंने अपनी जान दी है।