भारत और भारतीय सेना के बारें में चीनी मीडिया आये दिन कुछ इस तरह से खबरें छापता रहता है जैसे भारत में अभी भी 1962 जैसी परिस्तिथियाँ हो, और अपने देश की सेना के बारे में इस तरह से लिखता है जैसे वो मिनटों में भारत को हरा कर उस पर कब्ज़ा ही कर लेंगी।

चीन का सरकारी मीडिया और ग्लोबल टाइम्स अपने मुँह मियां मिठ्ठू बनने में कोई कसर नहीं छोड़ते। पर पहली बार चीन की सेना को मशीनरी सप्लाई करने वाली सबसे बड़ी कंपनी के मैगज़ीन के एडिटर ने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए एक लेख पब्लिश किया है।

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"मौजूदा समय में पूरे विश्व में ऊंचाई के इलाके और पहाड़ों पर लड़ाई के मामले में सबसे अनुभवी और ताकतवर सेना भारतीय सेना है, अमेरिकी, रूस या यूरोपियन फौजें भारतीय सेना की माउंटेन डिवीज़न के आगे कंही नहीं ठहरते", हुआंग गोजहि, वरिष्ठ संपादक, मॉडर्न वेअपनरी मैगज़ीन।

भारतीय फ़ौज की माउंटेन डिवीज़न में लगभग 2 लाख सैनिक है। सियाचिन जैसे बर्फीले इलाके में जो की दुनिया का सबसे ऊंचाई का युद्ध स्थल है और जंहा पर तापमान -60 डिग्री सेल्सियस तक जाता है, भारतीय सेना की सैकड़ों पोस्ट है। और उन पोस्ट पर साल भर भारतीय सेना के जवान तैनात रहते है। हड्डियां जमा देने वाली इस सर्दी और विषम वातावरण में युद्ध का अनुभव दुनिया की किसी भी फ़ौज को नहीं है।

हुआंग का ये लेख चीन की न्यूज़ वेबसाइट thepaper .cn में पब्लिश हुआ है जो भारतीय सेना के खिलाफ लेख लिखने और अपनी सेना की फर्जी ब्रांडिंग करने के लिए मशहूर है। लेख ऐसे समय लिखा गया है जब सीमा पर भारत और चीन का तनाव चरम पर है और डोकलाम के बाद ये पहला ऐसा मौका है जब दोनों देशों की सेना भारी तादाद में एक दूसरे के सामने खड़ी है।

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"माउंटेनियरिंग में दक्षता माउंटेन डिवीज़न के लिए सबसे जरूरी योग्यता है, और भारतीय सेना ने इसमें महारत के लिए कई प्राइवेट पर्वतारोहियों की मदद भी ली है", हुआंग के अनुसार सियाचिन में 6749 मीटर की ऊंचाई पर भारत के हजारों सैनिक तैनात रहते है जिन्हे बर्फ का टाइगर भी कहा जाता है। हालांकि हुआंग ने अपनी जानकारी का स्रोत लेख में नहीं लिखा है

भारतीय सेना ने घरेलू रक्षा कंपनियों और अमेरिकी कंपनियों की मदद से अपने तोपखाने में काफी सुधार किया है। सेल्फ प्रोपेलिंग गन K9 वज्र और अमेरिकी तोप M777 जोकि दुनिया की सबसे हल्की तोप है, ने भारतीय सेना की ऊंचाई पर लड़ने की क्षमता को काफी मजबूती दी है। M777 को चिनूक हेलीकाप्टर की मदद से ऊंचाई के इलाकों में बेहद कम समय में तैनात किया जा सकता है और ये तोपों 155 mm का बेहद ही खतरनाक गोला दुश्मन पर बरसाती है।