अमित शाह को देश के गृहमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली है. उनके चुनाव लड़ने के एलान के बाद से ही ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी और शपथ ग्रहण के बाद ये कयास भी लगाए जा रहे थे कि अमित शाह को गृहमंत्री की जिम्मेदारी मिलेगी. वो इस पद पर राजनाथ सिंह का स्थान लेंगे जिन्हें अब रक्षा मंत्री बनाया गया है. बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर पार्टी के लिए शानदार काम करने वाले अमित शाह के लिए नया पद किसी चुनौती से कम नहीं है. यहां तमाम ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें गृहमंत्री के तौर पर उन्हें निबटना होगा और ये उनके लिए कहीं से भी आसान नहीं होने वाला. तो आइए आपको बतातें हैं कि गृहमंत्री के तौर पर अमित शाह की 3 बड़ी चुनौतियां क्या होने वाली हैं-

1. कश्मीर में आतंकवाद-

बीजेपी ने अपने घोषणापत्र और चुनाव प्रचार में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा खूब उठाया. ये सही है कि राजनाथ सिंह के गृहमंत्री रहते देश के बाकी हिस्सों में आतंकी गतिविधियां नहीं हो पाई लेकिन कश्मीर को आतंकवाद से मुक्ति भी नहीं मिल पाई. यहां आज लगातार मुठभेड़ें होती हैं और जवान शहीद होते हैं. कश्मीर घाटी की बात करें तो यहां के लोगों में अलगाववाद की भावना मजबूत हुई है. इस हालात में स्थानीय लोगों को आतंक से दूर रखना बड़ी चुनौती है. पुलवामा जैसा बड़ा हमला होना बताता है कि कश्मीर घाटी में हमारे जवान ही सुरक्षित नहीं है. द क्विंट हिंदी की रिपोर्ट बताती है कि जम्मू-कश्मीर में इस साल सिर्फ चार महीने में 61 जवान शहीद हुए हैं. ये संख्या 2018 से ही ज्यादा है, जब पूरे साल में 91 जवान शहीद हुए थे. 2019 के इन 4 महीनों में 86 आतंकवादियों का खात्म हुआ. ऐसे में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पर काबू पाने के लिए अमित शाह क्या कदम उठाते हैं ये देखने वाली बात होगी. अनुच्छेद 370 का मुद्दा भी बीजेपी ने खूब उठाया है. जिस तरह का बहुमत इस बार सरकार को मिला है उसे देखते हुए लगता है कि सरकार इस पर कोई कदम उठा सकती है. विपक्ष भी लगातार इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर राजनीति करने का आरोप लगाता रहा है. ऐसे में अमित शाह के लिए ये मुद्दा भी एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है.

2. नक्सलवाद-

चुनाव प्रचार के दौरान जब पीएम मोदी राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर अपनी पीठ थपथपा रहे थे तभी महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में कमांडो टीम पर नक्सली हमला हुआ. इस हमले में 15 जवानों समेत 16 लोगों की मौत हो गई. चुनाव प्रचार के शोर में इन जवानों की शहादत छुप सी गई. गढ़चिरौली जैसे हमले नक्सलियों ने बार बार किए हैं और इनमें जवानों से लेकर नेताओं तक को अपनी जान गंवानी पड़ी है. छत्तीसगढ़ में बीजेपी के ही एक विधायक भीमा मांडवी ऐसे ही एक हमले में मौत हो गई थी. हिंदी अखबार हिंदुस्तान के मुताबिक 2009 से अब तक हुए आठ बड़े नक्सली हमलों में कम से कम 200 जवान शहीद हो चुके हैं. ऐसे में नक्सलवाद पर भी लगाम लगाने के मामले में अमित शाह की बड़ी परीक्षा होने वाली है.

3. महिला सुरक्षा-

बीते दिनों राजस्थान के अलवर में पति के सामने महिला से गैंगरेप का दर्दनाक मामला सामने आया था. उससे पहले जम्मू के कठुआ और यूपी के उन्नाव में भी रेप के मामलों पर काफी चर्चा हुई थी. 16 दिसंबर 2012 को देश की राजधानी दिल्ली में ही निर्भया गैंगरेप कांड हुआ था. इस कांड के बाद लोग सड़कों पर उतरे. उन्होंने प्रदर्शन किए और केंद्र सरकार की काफी आलोचना हुई. इसके बाद लगा कि रेप के खिलाफ देश में एक माहौल बनेगा और कुछ सुधार होगा. बीजेपी ने 2014 में अपने चुनाव अभियान के दौरान महिला सुरक्षा के मुद्दे पर एक लाइन लिखी थी, "बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार." 2014 से 2019 आ गया लेकिन देश तो छोड़िए राजधानी दिल्ली ही महिला अपराध से मुक्त नहीं हो पाई. ऐसे में देश के नए गृहमंत्री के सामने चुनौती होगी कि वो देश की महिलाओं को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कदम उठा सकें.