राजनीति में फिल्मी सितारों की एंट्री के बारे में हमने कल आपको बताया था.कैसे फिल्मी सितारे कई बार लोकप्रिय राजनेताओं की घंटी बजा देते हैं.हमने आपको बताया था की किस तरह से 2014 के चुनाव में पश्चिम बंगाल में मुनमुन सेन ने 9 बार के कॉमरेड सांसद वासुदेव आचार्य को हरा दिया था.आज भी हम सुनाने जा रहे हैं नेता और अभिनेता के बीच जंग के एक और किस्से के बारे में.ये किस्सा है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हेमवती बहुगुणा और बॉलीवुड के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन के बीच भिडंत का.1984 के उस चुनाव में हेमवती नंदन बहुगुणा को अमिताभ बच्चन ने ऐसे हराया था की उनके राजनीतिक करियर पर ही विराम लग गया.

हेमवती नंदन बहुगुणा को भारतीय राजनीति के बड़े नेताओं में गिना जाता है.वो उन नेताओं में थे जिन्होंने पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ रहते हुए इंदिरा गांधी से बैर लिया.यूपी के सीएम की कुर्सी पर 2 बार बैठने वाले हेमवती बहुगुणा 1952 में पहली बार विधायक बने थे.आजादी के बाद ही नहीं हेमवती बहुगुणा ने आजादी के पहले भी अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलनों में अहम भूमिका अदा की थी.1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.बचपन में पुलिस कमिश्नर बनने की चाह रखने वाले हेमवती बहुगुणा पर अंग्रेजों ने जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर 5 हजार रूपए का इनाम भी रखा था.वो यूपी के 8वें सीएम थे.1967 में उन्होंने वित्त मंत्री के तौर पर यूपी का एक शानदार बजट भी पेश किया था.

1975 में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया तो बहुगुणा और इंदिरा के संबंध खराब हो गए.ऐसा माना जाता है की हेमवती संजय गांधी के तौर तरीकों से खासे नाराज थे.1977 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी.बहुगुणा ने पूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम के साथ मिलकर कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी पार्टी बनाई.इस चुनाव में उन्हें 28 सीटें मिलीं.हालांकि बाद में उनकी पार्टी का विलय जनता दल में हो गया.इसके बाद वो देश के वित्त मंत्री भी रहे.1980 में बहुगुणा दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए.कांग्रेस ने चुनाव जीता भी लेकिन बहुगुणा को मंत्री नहीं बनाया गया.उन्होंने फिर से कांग्रेस छोड़ दी.हालांकि 1982 में उन्होंने उपचुनाव जीता भी.

1984 में वो इलाहाबाद से चुनाव लड़ने उतरे.राजीव गांधी उस वक्त अमिताभ बच्चन के करीबी दोस्त थे.राजीव ने अमिताभ को बहुगुणा के खिलाफ मैदान में उतार दिया.उस वक्त अमिताभ और उनकी पत्नी जया बच्चन ने जमकर प्रचार किया.वो जहां प्रचार करने जाते लोगों की भीड़ इकठ्ठा हो जाती और पुलिस के लिए इसे संभालना मुश्किल हो जाता.उस वक्त विरोधियों ने अमिताभ पर तीखे हमले किए.कई लोगों ने उन्हें नचनिया तक कहा.अमिताभ की सभाओं में होने वाली भीड़ को देखकर हेमवती ने कहा की ये अभिनेता के लिए जुटने वाली भीड़ है नेता के लिए नहीं.चुनाव में अभिनेता नेता पर भारी पड़ा और अमिताभ ने हेमवती को 1.87 लाख से ज्यादा वोटों से करारी शिकस्त दी थी.

चुनाव में हार के बाद बहुगुणा लोकदल में शामिल हुए.वहां उन्हें देवीलाल और शरद यादव के विरोध का सामना करना पड़ा.1984 चुनाव के बाद अमिताभ बच्चन ने संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और राजनीति से संन्यास ले लिया.1989 में बहुगुणा का निधन हो गया.उनकी बेटी रीता बहुगुणा जोशी और विजय बहुगुणा इस समय बीजेपी के नेता हैं.