केंद्र सरकार ने आज संसद में कहा कि पिछले दस सालों में नवोदय विद्यालयों में 37 छात्रों की आत्महत्या के कारणों का पता लगाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है. मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह जानकारी दी.इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी सरकार को इस मामले में नोटिस जारी कर चुका है.

कांग्रेस की विप्लव ठाकुर ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि इतने सारे छात्रों ने आत्महत्या क्यों की. उन्होंने कहा कि इसके कारणों का पता लगाने के लिए अभी तक कोई प्रयास नहीं किए गए हैं. सरकार का पक्ष रखते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने समिति के गठन की जानकारी दी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इन स्कूलों में परामर्शक नियुक्त करने पर काम कर रही है.

आपको बता दें की अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 2013 से 2017 के बीच 49 नवोदय छात्रों ने आम्महत्या कर ली थी.अखबार की इस रिपोर्ट को हमने भी आप तक पहुंचाया था.अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक 2013 में 8 बच्चों ने, 2014 में 7, 2015 में 8, 2016 में 12 और 2017 में 14 बच्चों ने आत्महत्या की। नवोदय विद्यालय में आत्महत्या करने वाले 16 बच्चे अनुसूचित जाति के थे। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चों की संख्या को मिलाकर यह आंकड़ा 25 हो जाता है। वहीं सामान्य और पिछड़ी जाति के 12-12 बच्चों ने मौत को गले लगाया है।

स्कूलों की रिपोर्ट के मुताबिक आत्महत्या के कारणों में सबसे ज़्यादा तीन तरह के बताए जाते हैं. ये हैं- असफल प्रेम संबंध, पारिवारिक समस्याएं और स्कूल की ओर से मिली शारीरिक प्रताड़ना की सज़ा. इसके बाद शिक्षकों का अपमानजनक व्यवहार, पढ़ाई का दबाव, डिप्रेशन और दोस्तों के बीच झगड़े जैसे कारणों का नंबर आता है.

प्रकाश जावडेकर ने अपने जवाब में नवोदय विद्यालय को आवासीय विद्यालय शिक्षा का एक बेहद सफल माध्यम करार देते हुए कहा कि 12वीं कक्षा में यहां के छात्रों के उत्तीर्ण होने का औसत 98 प्रतिशत रहा, जबकि सीबीएसई में यह 82 प्रतिशत है.