यूपी के गाजीपुर में चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है.बीएसपी ने यूपी की गाजीपुर सीट से बाहुबली अफजाल अंसारी को टिकट दिया है.अफजाल अंसारी और उनके भाई मुख्तार अंसारी का कौम एकता दल नाम की पार्टी थी जिसे उन्होंने बीएसपी में विलय कर दिया.पहले ये विलय समाजवादी पार्टी में होने वाला था लेकिन यादव परिवार की आपसी खटपट के बाद बीएसपी में हो गया.केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा गाजीपुर से सांसद हैं और वो इस बार भी मैदान में हैं.मनोज सिन्हा पीएम मोदी के करीबी हैं और एक वक्त में उनका नाम यूपी के सीएम के तौर पर भी सामने आ रहा था.गाजीपुर में आखिरी चरण में 19 मई को चुनाव है.

गाजीपुर से मनोज सिन्हा तीन बार चुनाव जीत चुके हैं.2014 में उन्होंने सपा की शिवकन्या कुशवाहा को 32,452 वोटों के अंतर से हराया था.चुनाव में सिन्हा को जहां 31 फीसदी वोट हासिल हुए थे वहीं शिवकन्या को 27.82 फीसदी वोट मिले थे.सिन्हा ने इस सीट से 6 बार चुनाव लड़ा है.1996,1999 और 2014 में वो चुनाव जीतने में कामयाब रहे,जबकि 1991,1998 और 2004 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.खास बात ये है कि महागठबंधन के तरफ से मैदान में उतरने वाले अफजाल अंसारी ने उन्हें 2004 के चुनाव में हराया था.अफजाल अंसारी ने ये जीत रिकॉर्ड वोटों से हासिल की थी.

अगर जातिगत धार्मिक समीकरणों के बारे में बात की जाए तो हिंदुओं की आबादी 89 फीसदी है जबकि 10 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है. यदि जातीय समीकरण पर ध्यान दिया जाए तो यह सीट पिछड़ा बाहुल्य सीट है जिसमें यादव, कुशवाहा, बिन्द, चौहान और राजभर हैं. जहां तक सवर्ण मतदाताओं की बात है तो उसमें राजपूत, ब्राह्मण और भूमिहार हैं.पिछड़ों की आबादी में भी कुशवाहा जाति के वोटर बहुमत में हैं.इस सीट पर डेढ़ लाख से लेकर पौने दो लाख वोटर तक कुशवाहा हैं.कुशवाहा वोटरों की बड़ी संख्या ही बीते चुनाव में शिवकन्या कुशवाहा के दूसरे नंबर पर रहने की अहम वजह थी.शिवकन्या कुशवाहा बीएसपी सरकार में मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी हैं.

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी जन अधिकार मंच से गठबंधन किया है.गाजीपुर में जन अधिकार मंच के प्रत्याशी अजीत प्रताप कुशवाहा को कांग्रेस ने अपने टिकट पर उतारा है.जाहिर तौर पर ये साफ है कि अजीत प्रताप कुशवाहा वोटरों को अपने पक्ष में लाने का प्रयास करेंगे.ऐसे में महागठबंधन के प्रत्याशी अफजाल अंसारी की मुश्किलें थोड़ी बढ़ेंगी.

मनोज सिन्हा यहां विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं.बीते दिनों उन्होंने एलान किया था कि अगर वो चुनाव लड़ेंगे तो गाजीपुर से ही लड़ेंगे अन्यथा चुनाव नहीं लड़ेंगे.सिन्हा का आत्मविश्वास देखकर लगता है कि वो चुनाव के लिए तैयार हैं.मनोज सिन्हा एक बार फिर से पीएम मोदी के नाम पर वोट मिलने की उम्मीद कर रहे होंगे.गाजीपुर सीट पर राजभर वोटर भी बड़ी संख्या में हैं और ओमप्रकाश राजभर ने कल ही बीजेपी से अलग चुनाव लड़ने का एलान किया था.राजभर का प्रत्याशी चुनाव भले ही न जीत पाए लेकिन बीजेपी को वो नुकसान तो पहुंचा ही सकते हैं.दूसरी तरफ अफजाल अंसारी को अपने मुख्तार अंसारी की रॉबिनहुड छवि का फायदा मिलेगा.उन्हें क्षेत्र के मुस्लिम वोटरों पर भी अपने पक्ष में मतदान का भरोसा होगा.

बेशक गाजीपुर के इस मैदान में उतरे तो तमाम महारथी हैं लेकिन मुख्य मुकाबला मनोज सिन्हा और अफजाल अंसारी के बीच है.जो अपने वोटरों का बिखराव रोक पाएगा,वो यहां का चुनाव भी जीत जाएगा.