केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपने ताजा अध्ययन में कहा है कि जिन 39 स्थानों से होकर गंगा नदी गुजरती है, उनमें से केवल एक स्थान पर इस साल मॉनसून के बाद गंगा का पानी साफ था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सीपीसीबी ने हाल ही में यह रिपोर्ट जारी की है.

सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार मानसून से पहले 41 में से केवल चार स्थानों पर पानी की गुणवत्ता साफ या मामूली प्रदूषित थी और मानसून के बाद 39 में से केवल एक स्थान पर.इसमें कहा या है कि मानसून के बाद केवल हरिद्वार में ही गंगा का पानी साफ था.गुणात्मक विश्लेषण के लिए मानसून से पहले और मानसून के बाद पानी के 80 नमूने लिए गए। इन्हें पांच श्रेणियों में रखा गया, साफ (A), मामूली प्रदूषित (B), मध्य प्रदूषित (C), बेहद प्रदूषित (D) और गंभीर प्रदूषित (E).रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 मानसून पूर्व अवधि में 34 स्थान मध्यम रूप से प्रदूषित थे, जबकि तीन गंभीर रूप से प्रदूषित थे।

रिपोर्ट में 2014 और 2018 के बीच एक तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया है.इस अध्ययन के अनुसार बहुत ही कम स्थान ऐसे हैं जिनमें कुछ सुधार हुआ है.जबकि कुछ स्थान तो ऐसे हैं जहां गंगा का पानी और भी ज्यादा खराब हुआ है.जिन जगहों पर हालत और भी खराब हुई है उनमें उत्तराखंड का जगजीतपुर और यूपी के कानपुर,प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं.2017-18 की रिपोर्ट में हरिद्वार में गंगा का पानी मानसून से पहले और बाद में सबसे ज्यादा साफ रहा है.जबकी मानसून से पहले ये कानपुर और वाराणसी में बुरी तरह से प्रदूषित थी.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश की दो बड़ी सहायक नदियां, पांडु नदी और वरुणा नदी गंगा में प्रदूषण बढ़ा रही हैं.अध्ययन में कहा, ‘‘गंगा नदी की मुख्यधारा पर कोई भी स्थान गंभीर रूप से प्रदूषित नहीं था लेकिन अधिकतर मध्यम रूप से प्रदूषित पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार गंगा बहाव वाले 41 स्थानों में से करीब 37 पर इस वर्ष मानसून से पहले जल प्रदूषण मध्यम से गंभीर श्रेणी में रहा।