लोकसभा चुनावों के लिए राजधानी दिल्ली भी तैयार है. यहां आने वाली 12 मई को मतदान किया जाएगा. देश की तमाम जनता की ये शिकायत रहती है कि नेता लोग उनके यहां वोट मांगने के वक्त हर पांच में आकर खड़े हो जाते हैं और बाकी वक्त में उनकी समस्याएं सुनने वाले कोई नहीं होता. दिल्ली के रेड लाइट एरिया जीबी रोड में काम करने वाली महिलाओं की भी कुछ ऐसी ही शिकायत है. बाकी तमाम नागरिकों की तरह इन महिलाओं को भी राजनेताओं से कोई उम्मीद नहीं है हालांकि ये महिलाएं मतदान को लेकर जागरूक हैं और वोट करने जाती हैं.

दिल्ली के जीबी रोड पर सेक्स वर्कर का काम करने वाली इन महिलाओं की जिंदगी पान की थूक से पटी पड़ी गलियों और छोटे छोटे कमरों में फंसी है. इन कोठों में काम करने वाली औरतें को हर पांच साल में अपने दरवाजे पर दस्तक देने वाले नेताओं से कोई उम्मीद नहीं है. जीबी रोड का ये इलाका दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा सीट में आता है. यहां से केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन सांसद हैं. इस बार भी वो चुनाव के मैदान में हैं. उनके अलावा कांग्रेस के जेपी अग्रवाल और आप के पंकज गुप्ता भी मैदान में हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इन महिलाओं को नोटबंदी से काफी नुकसान हुआ और वो इसे लेकर नाराज हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इन महिलाओं में से एक पूजा का कहना है, "मोदी सरकार के समय में हमें खासी दिक्कत हुई है. नोटबंदी के समय तो हमें भूखों मरने की हालत हो गई थी. हम एक ग्राहक से 250-500 से कमाते थे लेकिन उन दिनों लोग 500 और 1000 के नोट लेकर आते थे और बैंक अकाउंट न होने से हम रूपए ले भी नहीं पाते थे". पूजा के साथ रहने वाली रोमा का कहना है कि उनका धंधा कानूनी बनाया जाना चाहिए क्योंकि एक युवावस्था खत्म होने के बाद महिलाओं को 50 रूपए भी कस्टमर नहीं देते."

रोमा का कहना है, "सरकार को हमारे लिए शेल्टर होम बनाने चाहिए या ऐसा कानून बनाना चाहिए जिसमें पुनर्वास, पेंशन स्कीम, हमारे बच्चों के भविष्य की सुरक्षा और हमारे काम करने के घंटे तय किए जाए." पूजा के लिए सफाई भी एक अहम मुद्दा है और उनका कहना है "हमारे बच्चे यहां की गंदगी से बीमार हो जाते हैं. नेताओं से शिकायत करने पर हमें महज वादें सुनने को मिलते हैं."

यहां काम करने वाली एक और महिला रोमा भी नोटबंदी से नाराज हैं और केजरीवाल सरकार से खुश हैं. केजरीवाल सरकार का बिजली और पानी का दाम कम करना इन्हें अच्छा कदम लगता है. एक और महिला आरती हाल ही में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से वोट डालकर लौटी हैं. आरती कहती हैं ,"चाहें लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव, मैं अपना वोट हमेशा डालती हूं. हम इस देश के नागरिक हैं और अपने कर्तव्य पूरे करना हमारी जिम्मेदारी है. ये सही है कि हमारे लिए घर जाने के लिए पैसे जुटाना मुश्किल होता है लेकिन फिर भी वोट डालने के लिए अपनी डेली खर्च में से भी कटौती करती हूं."

जीबी रोड के घुटन भरे कमरों में सेक्स वर्कर का काम करने वाली महिलाओं की अपनी अपनी कहानियां हैं. किसी को पति ने छोड़ दिया तो किसी को विधवा होने के बाद यहां आना पड़ा. किसी को गरीबी से पेट पालने में नाकाम परिवारों ने यहां भेज दिया. विडंबना ये है कि सरकारों ने भी इनकी अनदेखी की है. इन तमाम विकट समस्याओं के बीच इनकी मतदान के प्रति उत्सुकता अपने आप में एक जीवटता का उदाहरण है.