राफेल डील पर राहुल गांधी के तीखे तेवरों का सामना कर रही मोदी सरकार एक बार फिर से घिरती नजर आ रही है.दरअसल इस विवाद में नया मोड़ तब आ गया जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने ये खुलासा किया की भारत सरकार ने खुद रिलायंस का नाम आगे बढ़ाया था साथ ही किसी भी अन्य भारतीय कंपनी का नाम विकल्प के लिए नहीं रखा था.ओलांद के बयान के कुछ ही देर बाद फ्रांस सरकार ,डसॉल्ट कंपनी की ओर इसका खंडन आ गया.दोनों का कहना था की डील में कंपनियों को अपना साझेदार चुनने की आजादी है डसॉल्ट ने रिलायंस को खुद अपना पार्टनर चुना है.ओलांद के बयान के बाद कांग्रेस और विपक्ष भारत सरकार पर हमलावर है तो वहीं बीजेपी फ्रांस सरकार और डसॉल्ट के बयानों के जरिए विपक्ष को जवाब देने में जुटी है.

अगर ओलांद की बात पर यकीन करें तो कांग्रेस का दावा यकीन में बदलता दिखता है.लेकिन सवाल तो ओलांद पर भी उठता है.अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने खुलासा किया था की राफेल डील के ठीक दो दिन पहले अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस एंटरटेनमेंट ने एक फ्रेंच फिल्म के प्रोडक्शन के लिए साइन किय़ा था और खास बात ये है की फिल्म में एक साझेदार ओलांद की पत्नी जूली गाए भी थीं. (Tout La-Haut.)फिल्म 20 दिसंबर 2017 को फ्रांस में रिलीज हुई थी.ओलांद के बारे में इस खुलासे के बाद से वो फ्रांस की मीडिया में भी घिर गए और आलोचना का शिकार बने.सवाल यहीं पर पैदा होते हैं कि

1.क्या ओलांद खुद को बचाने के लिए इस नए आरोप के जरिेए सनसनी पैदा कर रहे हैं ?

2.क्या राफेल डील से महज दो दिन पहले रिलायंस का ओलांद की पत्नी के साथ साझेदारी में फिल्म बनाने की डील महज एक इत्तेफाक थी? वैसे तो फ्रांस सरकार और डसॉल्ट की सफाई के बाद ओलांद के बयान का मतलब खत्म हो जाता है लेकिन बेहतर होता की रिलायंस और ओलांद की पत्नी के साझेदारी के बारे में ठीक से खुलासा होता और वाकई डील में कुछ गलत है और ओलांद सच बोलना ही चाहते हैं तो पूरे सच के साथ सामने आएं

आपको बता दें की राफेल डील को लेकर कांग्रेस मोदी सरकार पर लगातार हमलावर रही है.कांग्रेस का दावा है की देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मित्र' अनिल अंबानी को डील के जरिए फायदा पहुंचाया.हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को मिलने वाली डील को जानबूझकर अनिल अंबानी को वो डील दी गई जिससे देश को आर्थिक नुकसान पहुंचा.कांग्रेस का दावा है कि जो डील यूपीए के समय में 590 करोड़ में हुई थी वही डील नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के समय 1690 करोड़ में हुई.