दूसरे चरण के लोकसभा चुनाव में 18 अपैल को होने वाले मतदान के दौरान जिन सीटों पर नजर रहेगी उनमें फतेहपुर सीकरी एक है.यूपी की 'वीआईपी' बन चुकी सीटों में से एक फतेहपुर पर अभी बीजेपी का कब्जा है.अगर बात सीट के वीआईपी होने की करें तो यहां से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और अभिनेता राज बब्बर चुनाव लड़ रहे हैं.इससे पहले कांग्रेस ने उन्हें मुरादाबाद सीट से उतारा था लेकिन बाद में उनकी सीट बदल दी गई.

अगर फतेहपुर सीकरी के चुनावी इतिहास के बारे में बात की जाए तो एक लोकसभा क्षेत्र के तौर पर ये 10 साल पुराना ही है.2009 में नए परिसीमन के चलते ये सीट अस्तित्व में आई.अब तक इस सीट पर एक बार बीएसपी और एक बार बीजेपी का कब्जा रह चुका है.बीएसपी नेता रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय ने यहां से 2009 में जीत दर्ज की थी.इस चुनाव में राज बब्बर दूसरे स्थान पर रहे थे.2014 में बीजेपी के बाबूलाल चौधरी ने जीत हासिल की थी.खास बात ये है कि बाबूलाल चौधरी 2009 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे लेकिन 2014 में उन्होंने करीब पौने दो लाख दो वोटों से सीमा उपाध्याय को शिकस्त दी.इस चुनाव में बाबूलाल चौधरी को 45 फीसदी वोट हासिल हुए थे.2014 के इस चुनाव में कांग्रेस ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था.दरअसल आरएलडी के साथ गठबंधन के बाद ये सीट उनके पास चली गई और अमर सिंह ने यहां से ताल ठोंकी.हालांकि अमर सिंह को चुनाव में कड़ी हार का सामना करना पड़ा और वो चौथे स्थान पर रहे.

अगर इस सीट के जातिगत और धार्मिक आंकड़ों के बारे में बात करें तो यहां कुल साढ़े सोलह लाख से ज्यादा मतदाता हैं.यहां राजपूत और ब्राह्मण वोटर बड़ी संख्या में हैं.राजपूत वोटर 3 लाख से ज्यादा हैं,वहीं ब्राह्मण वोटर की संख्या ढाई लाख के करीब है.इसके बाद जाट लगभग 2 लाख,लोध-निषाद 1 लाख 80 हजार,दलित 1 लाख 41 हजार,कुशवाहा 1 लाख 20 हजार,मुस्लिम 76 हजार वहीं वैश्य वोटर की संख्या 69 हजार है.

लोकसभा चुनाव में गठबंधन के काफी समीकरणों को बदला है.बीजेपी ने पुराने सांसद का टिकट यहां काट दिया है.उनकी जगह राजकुमार चाहर को उम्मीदवार बनाया है.वो जाट जाति से आते हैं.बीएसपी ने यहां ब्राह्मण,दलित और मुस्लिम समीकरण बनाने की कोशिश की है और दबंग नेता गुड्डू पंडित को टिकट दिया है.आरएलडी से गठबंधन के बाद बीएसपी को उम्मीद होगी कि यहां के जाट भी उनका समर्थन करेंगे.कांग्रेस के उम्मीदवार राज बब्बर के बारे में हम पहले ही बात कर चुके हैं.वो अपने स्टारडम के जरिए जनता को पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं.उनके बेटे-बेटी प्रतीक बब्बर और जूही बब्बर उनकी मदद कर रहे हैं.शिवपाल की पार्टी पीएसपी ने यहां से समाज सेवी की छवि वाली मनीषा सिंह को उम्मीदवार बनाया है.मनीषा ठाकुर जाति से संबंधित हैं.

बीजेपी को यहां अपने कोर वोटर पर भरोसा होगा.बीजेपी,राजपूत,ब्राह्मण,वैश्य और स्थानीय जाट उम्मीदवार होने के चलते जीत की उम्मीद कर रही होगी.लोध वोटरों से भी उन्हें उम्मीद होगी.दूसरी तरफ गुड्डू पंडित की छवि ब्राह्मण नेता की है.वो स्थानीय ब्राह्मणों के साथ दलित,मुस्लिम और जाट वोटरों को साथ लाने की उम्मीद करेंगे.राज बब्बर भी अपने स्टारडम के जरिए मतदाताओं को साथ लाने की कोशिश करेंगे.बेशक राज बब्बर पिछला चुनाव हारे थे लेकिन 2012 में फिरोजाबाद में डिंपल यादव को शिकस्त देकर बता चुके हैं कि वो चुनाव जीतने में कम माहिर नहीं हैं.पड़ोसी जिले आगरा से वो 2 बार सांसद भी रहे हैं.फतेहपुर सीकरी में भी वो 2009 में दूसरे स्थान पर रहे थे.पीएसपी की मनीषा सिंह यहां ठाकुर वोटरो के जरिए निशाना लगाने की कोशिश करेंगी.

अभी के जातिगत और धार्मिक समीकरणों से बीजेपी यहां भारी दिखती है लेकिन हर पार्टी के मजबूत उम्मीदवार ने यहां की लड़ाई को रोचक बना दिया है.अगर बीजेपी ये सीट बचाना चाहती है तो उसे अपने कोर वोटर को पक्ष में लाने की कोशिश करनी होगी अन्यथा कांग्रेस और महागठबंधन में से कोई भी एक बाजी मार सकता है.