लोकसभा चुनाव का एलान हो चुका है.सियासत का पारा भी अपने चरम पर पहुंचने वाला है.देश में सभी निरपेक्ष राजनीति करने का दावा करते हैं लेकिन सभी के अपने अपने वोट बैंक और सबकी सियासत भी उसी ओर बढ़ रही है.इस चुनावी दौर की खासियत ये है की राजनीति का स्तर गर्त में चला जाता है.
वैसे पुरानी पार्टियां राजनीति में माहिर रही हैं लेकिन गर्त वाली राजनीति में आम आदमी पार्टी का कोई सानी नहीं है.सनसनीखेज आरोप लगाकर माफी मांगने में माहिर आम आदमी पार्टी ने चुनाव का एलान होते ही अपने स्वाभाविक रंग को दिखाना शुरू किया.इनका आरोप है की रमजान में चुनाव का एलान इसलिए किया गया है ताकि मुस्लिम कम वोट डाल सकें और बीजेपी को फायदा.इनके बयान को कुछ मुस्लिम मौलानाओं का भी समर्थन मिला है.हालांकि बड़ी तादाद में मुस्लिमों नेताओं ने इसकी आलोचना भी की है. आम आदमी पार्टी का ये बयान आखिर तार्किकता के सभी पैमानों से परे मालूम पड़ता है.

आम आदमी पार्टी का आरोप है की रमजान की वजह से कम लोग वोट डालने जाएंगे.इस पार्टी को ये जान लेना चाहिए की रमजान मुस्लिमों का पवित्र महीना है.वो रोजा रखते हैं.अपने अल्लाह की इबादत करते हैं,लेकिन अपने काम को प्रभावित नहीं होने देते.उसका सीधा कारण है की रोजी रोटी के लिए काम करना जरूरी है.एक रिक्शावाला भी भयंकर धूप में रिक्शा खींचकर रोजा रखता है क्योंकि ये उसके विश्वास से जुड़ा हुआ है.वो रोजे को किसी बहाने के लिए या आलस के लिए इस्तेमाल नहीं करेगा.ऐसे में जो भी मुस्लिम वोट डालना चाहेंगे उनके लिए रमजान बाधा नहीं होगा.जिन अमानतुल्लाह खान ने ये मुद्दा उठाया है शायद वो जरूर घर से निकलने में हिचके क्योंकि वो सुविधा संपन्न व्यक्ति हैं.उन्हें रोजे में बाहर निकलने और चुनाव प्रचार करने में परेशानी होगी लेकिन भला इसके लिए मुस्लिमों के भरोसे पर सवाल क्या खड़ा करना.अपनी ठेकेदारी अपने तक रखनी चाहिए

आम आदमी पार्टी को य़े आरोप लगाने से पहले ये भी जान लेना चाहिए की चुनाव आयोग चुनाव का फैसला अपने तमाम संसाधनों और समय के आधार पर करता है.देश एक लोकतांत्रिक व्यवस्था से चलता है.जिसमें समय पर चुनाव की अपनी अहमियत है.चुनाव आयोग अगर रमजान और नवरात्र देखकर चुनाव कराने लगेगा तो ये अराजकता ही फैलेगी और कुछ नहीं.ऐसे में एक राजनीतिक दल के तौर पर आप को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो जिस सिस्टम में काम करते हैं उस पर इतने भद्दे सवाल न खड़ा करें.

जैसा की हमने ऊपर ही लिखा है की चुनाव के इस दौर में राजनीति और भी गर्त में जाएगी.आम आदमी पार्टी ने उसकी भयंकर शुरूआत कर दी है.जल्द ही अन्य पार्टियां भी ऐसा करेंगी.इन्हीं फर्जी के मुद्दों पर चर्चा होती रहेगी और नेता लोग जनता का दिमाग बांटकर आराम से चुनाव पार करने की कोशिश करेंगे.