बीजेपी ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ मांलेगांव धमाके की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है.वो भोपाल से दिग्विजय सिंह को चुनौती देंगी.आपको बता दें कि भोपाल बीजेपी का गढ़ माना जाता है और बीजेपी यहां बीते 30 साल से चुनाव नहीं हारी है.यही वजह है कि जब एमपी के सीएम कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह को किसी कठिन सीट से लड़ने की चुनौती दी तो भोपाल उनमें ऊपर था.अब दिग्विजय के सामने जहां बीजेपी के गढ़ को गिराने की चुनौती है वहीं प्रज्ञा ठाकुर पर इसे बचाने की जिम्मेदारी होगी.

प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से देश में लिबरल तबके ने इसकी आलोचना की है. प्रज्ञा ठाकुर की तुलना हाफिज सईद और अजहर मसूद से की जा रही है.खैर देश में अपने अपने तरह की सियासत चलती रहती है और देश का कथित लिबरल तबका भी इस सियासत से अछूता नहीं रहा है.इस सबके बीच हम आपको बताने जा रहे हैं उस सीधी सियासत के बारे में दिग्विजय,भोपाल और प्रज्ञा ठाकुर के जरिए विकसित की जा रही है.इस सियासत को समझने के लिए आपको 2007 के समझौता एक्सप्रेस हमले,2008 के मांलेगांव विस्फोट और मुंबई हमलों की तरफ जाना होगा.

मांलेगांव विस्फोट और समझौता एक्सप्रेस धमाकों के बाद हिंदू आतंकवाद की एक थ्योरी सामने आई.इन हमलों में अभिनव भारत का नाम सामने आया.साध्वी प्रज्ञा,लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित,असीमानंद समेत कई लोगों के नाम इन हमलों में सामने आया.दिग्विजय सिंह समेत कई कांग्रेसी नेताओं ने हिंदू आतंकवाद की थ्योरी के बारे में जमकर बातें बोलीं.2008 में इस मामले में दिग्विजय सिंह ने यहां तक कह दिया कि मुंबई हमलों में भी हिंदू आतंकवादियों का हाथ है.दरसअल मांलेगांव हमलों की जांच कर रहे मुंबई एटीएस मुंबई हेंमत करकरे मुंबई हमले में शहीद हो गए थे.दिग्विजय ने यहां तक दावा किया कि करकरे ने उनसे बातचीत में हिंदू आतंकवादियों से अपनी जान को खतरा भी बताया था.करकरे की पत्नी कविता करकरे ने हालांकि उनके इस दावे का खंडन भी किया.दूसरी तरफ दिग्विजय सिंह ने दिल्ली में हुए बाटला हाऊस एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादियों की सहानुभूति में बयान भी दिए. इस तरह दिग्विजय सिंह हिंदुत्व के खिलाफ एक कथित चेहरे बन गए.

इस बीच प्रज्ञा ठाकुर जेल में रहीं.इसी बीच 2010 में विकिलीक्स ने अपने खुलासों से दुनिया में तहलका में मचा दिया.भारत की राजनीति में भी इसका असर पड़ा.दरअसल विकिलीक्स के एक खुलासे के मुताबिक तल्कालीन कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत से हिंदू आतंकवाद के बारे में बात की.विकिलीक्स के मुताबिक राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत से बात करते हुए कहा कि लश्कर जैसे संगठनों को मुस्लिमों का समर्थन है लेकिन भगवा आतंकवाद देश के लिए ज्यादा बड़ा खतरा हैं.2014 के चुनाव में बीजेपी ने हिंदू आतंकवाद का मुद्दा जोरशोर से उठाया.कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा और चुनाव में उनकी हार हुई.कांग्रेस की हार की समीक्षा के लिए गठित एंटनी कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि हिंदुओं की नाराजगी कांग्रेस को भारी पड़ी.

कांग्रेसी नेता सुशील शिंदे ने यूपीए सरकार में गृहमंत्री रहते हुए RSS कैंप में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा देने की बात कही थी और बीजेपी के बड़े विरोध के बाद माफी भी मांगी थी.कुछ वक्त पहले पीएम मोदी ने शिंदे को निशाने पर लेते हुए हिंदू आतंकवाद का मुद्दा उठाया लेकिन इस बार चुनाव में वो उस तरह से नहीं आ पाया जिसकी बीजेपी और पीएम मोदी ने उम्मीद की होगी. उधर कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को भोपाल से उतार दिया.बीजेपी ने इसे एक बड़े मौके के तौर पर देखा है.भोपाल में बीजेपी की मजबूत स्थिति को देखते हुए बीजेपी ने प्रज्ञा ठाकुर को उतार दिया.अब इन दोनों के बीच ये जंग न तो 2019 के लोकसभा चुनाव की है,न ये मोदी को पीएम बनाने या हटाने की है,अब ये जंग वापस 2014 के दौर में पहुंच गई है जहां पर मुद्दा फिर से हिंदू आतंकवाद का उठेगा.

इस चुनाव में मीडिया का अटेंशन अब तक बिहार के बेगूसराय में बड़ा जोर शोर से था लेकिन अब भोपाल भी उसी श्रेणी में आने वाला है.लोगों की निगाहें जितनी भोपाल पर अब टिकेंगी उतना ही देशभर में हिंदू आतंकवाद का मुद्दा गरमाएगा.भोपाल से उम्मीदवार बनाए जाने के एक दिन बाद ही प्रज्ञा ने जेल में अपने ऊपर जुल्म को बारे में बताया और भावुक हो गईं.उनके ये बयान देशभर में चलेंगे और न केवल भोपाल बल्कि पूरे देश में बीजेपी के लिए एक बड़ा फायदा साबित हो सकते हैं.उधर दिग्विजय सिंह के सामने भी चुनौती बड़ी है.वो अपने बयानों के लिए जाने जाते है.अगर उन्होंने भूलवश भी कोई विवादित बयान दिया तो भोपाल में उन्हें ही नहीं बल्कि कांग्रेस को देशभर में इस नुकसान भुगतना पड़ सकता है.

कहते हैं कि कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह से भोपाल से लड़ने की बात कहकर एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की लेकिन दिग्विजय के खिलाफ बीजेपी के उम्मीदवार ने पूरी कांग्रेस को चिंता में डाल दिया होगा. अगर वो प्रज्ञा पर ज्यादा हमला करते हैं,बीजेपी पर अति हिंदूवादी होने का आरोप लगाते हैं तो भी उन्हें नुकसान हो सकता है.अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो भोपाल में दिग्विजय सिंह जैसे नेता को हार के सामने डालते हैं.जो भी हो चुनाव का दूसरा चरण कल संपन्न हो गया है और राजनीतिक दल अभी भी दांव पेंच चलने में लगे हुए हैं. दिग्विजय सिंह और प्रज्ञा ठाकुर के जरिए की ये जंग चुनाव को एक अलग ही रंग दे सकती है.