बीते दिनों देश की राजधानी दिल्ली में भयंकर दंगा हुआ. इस दंगे में 42 लोगों की मौत हो गई. बहुत से लोग घायल हो गए. बहुत से लोगों की दुकानें जला दी गईं, घर जला दिए गए. दिल्ली में दंगा तब हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिन के भारत दौरे पर आए थे. इस दंगें में वैसे तो हिंदू मुस्लिम दोनों की मौत हुई लेकिन मुस्लिम इलाकों में नुकसान ज्यादा नजर आ रहा है. न्यूज चैनलों पर दिल्ली के रैन बसेरों की खबरें भी चल रही हैं और इनमें अधिकतर मुस्लिम परिवार ही शरण लिए हुए हैं. इसी बीच दिल्ली के अशोक नगर की एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें एक मस्जिद की मीनार पर कुछ लड़के तिरंगा और भगवा झंडा लहराते दिख रहे हैं. भारत में हिंदू-मुस्लिम का झगड़ा पुराना है, देश का बंटवारा भी इसी वजह से हुआ लेकिन मस्जिद पर भगवा और तिरंगा लहराने की तस्वीर पहली बार नजर आई. दिल्ली दंगा और कट्टर हिंदुत्व की इस तस्वीर के बारे में आज हम विश्वेषण करेंगे.

दिल्ली दंगे की परतें इसके शांत होने के बाद खुल रही हैं. छतों पर गुलेल लगाई गईं. इनसे पेट्रोल बम और पत्थर फेंके गए. रिक्शों में वेल्डिंग के जरिए भी बड़ी गुलेल लगाई गईं थीं. पत्थरों की संख्या इतनी है कि कई इलाकों में सड़कों से पत्थर की सफाई का काम अभी भी जारी है. ये सब देखकर लगता है कि दंगों एक योजना के तहत किए गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भारत यात्रा पर थे और उनके दौरे के दौरान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर CAA का मुद्दा उठाने के लिए ये साजिश रची गई. साजिश रचने वाले अपने मकसद में कामयाब भी रहे और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में दिल्ली के दंगे ने जगह भी बनाई. अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार बर्नी सैंडर्स ने भी डोनल्ड ट्रंप पर निशाना साधा. दरअसल डोनाल्ड ट्रंप ने भारत में प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल के जवाब में दिल्ली में हिंसा पर बोलने से मना कर दिया था. चूंकि हिंदू पक्ष बीजेपी का सपोर्टर है जो सत्ता में है और वो कभी नहीं चाहती होगी कि डोनल्ड ट्रंप के दौरे के दौरान ऐसा कुछ हो, इसलिए दंगों की ये तैयारी मुस्लिम पक्ष की ओर से ही दिखती है. संभव ये है कि इसके पीछे दुश्मन देश या भारत की किसी राजनीतिक पार्टी का हाथ भी हो और मुस्लिमों को मोहरा बनाया गया हो. बीजेपी नेता कपिल मिश्रा को भले ही दंगा भड़काने का आरोपी बताया जा रहा हो लेकिन उनके बयान में ऐसा कुछ नजर नहीं आता जिससे हिंदू पक्ष इतना भड़क जाए कि हिंसा कर बैठे बल्कि कपिल ट्रंप के जाने के इंतजार की बात कह रहे थे. हालांकि लोगों की भीड़ एक क्षेत्र में ले जाने के लिए उन्हें दोषी बताया जा सकता है जिसके ऊपर पथराव हुआ और दंगे की शुरुआत हुई.

सवाल इस दंगे में हिंदू पक्ष के जवाब का है. मस्जिद पर तिरंगा और भगवा लहरा दिया गया एक मजार को तोड़ दिया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि मजार पर मुस्लिमों से ज्यादा हिंदू जाते थे. विध्वंस की ये तस्वीरें भारत और हिंदुओं दोनों के लिए खतरनाक संकेत हैं. जय श्रीराम के नारे के साथ दूसरे धर्म के पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाना दिखाता है कि हम मुगलिया और मुस्लिम आक्रांताओं की राह पर चलने लगे हैं. अल्लाहू अकबर के नारे के साथ मुस्लिम आक्रांता ही हिंदुओं के मंदिरों को तोड़ते थे. दरअसल हिंदुओं के मन के एक डर है, हिंदुओं को भी लगता है कि उनका धर्म संकट में है. हिंदुओं के इस ताजे डर की एक बड़ी वजह है. वो वजह है कांग्रेस का 10 साल का शासन और वामपंथियों के द्वारा हिंदू धर्म के बारे में गलत बातें बोलना. राहुल गांधी ने हिंदू आतंकवाद को इस्लामिक आतंकवाद से खतरनाक बताया. दिग्विजय सिंह ने मुंबई हमलों को RSS की साजिश बताया. मणिशंकर अय्यर जैसे नेता भी तमाम बातें बोलते रहे. सेकुलरिज्म की आड़ में कांग्रेस ने हिंदुओं की भावना पर जमकर प्रहार किया. 2014 के चुनाव से पहले तक मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए कांग्रेस सांप्रदायिकता विरोधी बिल लेकर आई. ये बिल अगर पास हो जाता तो दंगे होने पर हिंदु या बहुसंख्यक समुदाय ही दंगों का दोषी होता. इसी दौरान वामपंथियों के गढ़ जेनएयू में महिषासुर की पूजा की गई. दुर्गा जी को लेकर भयानक टिप्पणियां हुईं. कांग्रेस और वामपंथियों के इस मूर्खतापूर्ण आचरण ने बीजेपी को मौका दिया कि वो हिंदुओं में कट्टरता बढ़ा सके. कांग्रेस के शासन में हिंदुओं को लगा कि जल्द ही देश में वो दोयम दर्जे के नागरिक बनकर रह जाएंगे. 2014 में सरकार जाने के बाद भी कांग्रेस और वामपंथी नेता, विचारक और पत्रकार सेकुलरिज्म की आड़ में हिंदुओं को कोसते रहे. कांग्रेस और वामपंथियों का ये आचरण ही आज देश को इस मोड़ पर ले आया है.

आज बीजेपी हिंदुत्व के कार्ड को खूब इस्तेमाल कर रही है. वाट्स एप पर खूब जहर फैलाया जा रहा है. इतिहास और वर्तमान की तमाम तस्वीरों को गलत रूप से पेश किया जा रहा है और बताया जा रहा है कि हिंदू धर्म कैसे संकट में है. आज हिंदू धर्म को अपने वास्तविक इतिहास को जानने की जरूरत है. हिंदूओं को औरंगजेब के शासनकाल के अत्याचारों को पढ़ने की जरूरत है. जब मंदिर तोड़े गए, जजिया लगाया गया, जबरन धर्म परिवर्तन हुए और तमाम अत्याचार हुए. हिंदुओं को सोचना चाहिए कि जब उस दौर में भी हिंदू धर्म सुरक्षित रहा तो भला कुछ कांग्रेसी और वामपंथियों का दुष्प्रचार और अनर्गल बातें इसे कैसे खत्म कर सकती हैं.

हिंदू धर्म की पहचान इसके सनातन होने से है. सहिष्णुता और भाईचारा ही हिंदू धर्म के मूल हैं. हिंदू धर्म का पुराना इतिहास रहा है कि हमने सबको शरण दी, कभी किसी की धार्मिक आस्था पर चोट नहीं पहुंचाई और हमेशा सभी धर्मों का सम्मान किया. अगर इनमें से कोई गुण खत्म होता है तो वाकई हिंदू धर्म संकट में आएगा. दिल्ली दंगों में मस्जिद पर भगवा लहराने और मजार तोड़ने की घटना दुखद है. हम अपने सिद्धांतों को त्यागकर कभी भी महान नहीं हो सकते. हिंदूओं के वाकई अब जागने का वक्त है, वर्ना दुनिया हमारा मजाक उड़ाएगी और हम पिछड़े लोगों की तरह जाने जाएंगे और हमेशा पिछड़ते ही जाएंगे.