देश में एक बार फिर से चुनाव हैं और कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े नेता होने के नाते राहुल गांधी फिर से मैदान में हैं. शुक्रवार को राहुल गांधी ने RJD नेता तेजस्वी यादव के साथ एक रैली को संबोधित किया और अपनी रैली में चीन और अंबानी-अडानी के मुद्दे पर पीएम मोदी को घेरने की कोशिश की. चीन के मुद्दे पर घेरने के चक्कर में राहुल गांधी भारत की 1200 किमी जमीन, चीन के कब्जे में बता गए. गलती है कई बार लोगों से हो जाती है लेकिन राहुल गांधी ऐसी गलतियां बार-बार करते हैं और सुधार भी नहीं करते. खासतौर पर तब जब पप्पू कहकर उनकी एक विशेष छवि बनाने की कोशिश की गई है. खैर राहुल गांधी के इस पूरे भाषण पर नजर डालते हैं और सोचते हैं कि क्या वाकई राहुल अपनी बड़ी गलतियों से कुछ सीखे हैं या नहीं.

राहुल गांधी ने अपने भाषण में चीन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. ये जानते हुए भी कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर मोदी सरकार की छवि हमेशा मजबूत रहती है. बिहार में चुनाव कवर कर रहे कई रिपोर्टरों की मानें तो अनुच्छेद 370 को हटाने जैसा मुद्दा अभी भी जनता के जहन में है. बीते दिनों एक भाषण में राहुल ने 15 मिनट के भीतर चीनी सैनिकों को देश से निकालने की बात कर डाली थी. कांग्रेस सरकार के दौरान, बीजेपी लगातार पाकिस्तान पर सरकार के रुख को लेकर हल्ला बोलती रही. 26/11 के बाद भी पाकिस्तान पर कार्रवाई न होने का बीजेपी ने मुद्दा खूब उठाया और कांग्रेस को राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कमजोर साबित कर दिया. 6 साल में बीजेपी के पास, 2 सर्जिकल स्ट्राइक और इसके डिप्लोमेसी में पाकिस्तान को अलग-थलग करने की उपलब्धियां हैं. चीन के साथ विवाद ज़रूर हुआ लेकिन डोकलाम के बाद एक बार फिर चीन को निराशा ही हाथ लगी. ऐसे में राहुल गांधी अगर चीन का मुद्दा उठाते हैं तो इसे सिर्फ राजनीति और बड़बोलापन कहा जाएगा. ऐसे में राहुल गांधी को इसका क्या फायदा मिलने वाला है, ये वो और उनकी पार्टी ही बेहतर जान सकती है.

चीन की तरह ही, राहुल ने पीएम को एक बार फिर अंबानी-अडानी के मुद्दे पर घेरा. राहुल गांधी पिछले 6 साल से लगातार सूट-बूट की सरकार, अंबानी-अडानी की सरकार बोलते रहे हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने राफेल के मुद्दे को अंबानी-अडानी के साथ जोड़कर खूब हमला किया, नतीजा क्या हुआ सभी जानते हैं. बिहार में चुनाव कवर कर रहे रिपोर्टरों की मानें तो लोगों के मोदी सरकार को लेकर नाराजगी नहीं है. किसान निधि और डायरेक्ट बेनिफिट की बाकी योजनाओं से मोदी सरकार अपनी छवि को गरीब विरोधी होने से बचा रही है. ऐसे में इस पुराने नारे पर लगातार चलते रहना कौन सी समझदारी की बात है लेकिन राहुल गांधी उसी राह पर चलते जा रहे हैं.

बीते दिनों बेरोजगारी का मुद्दा छाया रहा. पहली बार ऐसा हुआ जब पीएम मोदी के वीडियो को यूट्य़ूब पर ज्यादा डिसलाइक मिले. सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ ट्रेंड चले. ऐसे में बेरोजगारी को लेकर एक माहौल तैयार हुआ और यूपी सरकार को दबाव में आकर कई एलान भी करने पड़े. बिहार में राहुल गांधी के सहयोगी तेजस्वी यादव भी ये मुद्दा उठाए हुए हैं. उन्होंने सरकार बनने पर 10 लाख रोजगार देने का वादा किया है. इसके बाद बीजेपी ने भी सरकार बनने पर 19 लाख रोजगार देने का वादा किया. कुल मिलाकर तेजस्वी एक मुद्दे पर, बीजेपी को अपनी पिच पर लाने में कामयाब रहे लेकिन राहुल गांधी फिर से बीजेपी की पिच पर बैटिंग करने जा रहे हैं. लॉकडाउन के दौरान, मजदूरों की हालत, कोरोना के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था, ये सब बड़े और जनता से एकदम जुड़े हुए मुद्दे हैं. इनको उठाओ, थोड़ी देर लग सकती है लेकिन आखिर में कहीं न कहीं, जनता पर असर पड़ता है. चीन, पाकिस्तान, कश्मीर, सेकुलरिज्म ये सब बीजेपी की पिच के मुद्दे हैं, आप वहां खेलने जाएंगे तो जरूर आउट होंगे.

चुनाव के लिए वोट डाले जाने में अभी थोड़ा समय है. बेहतर होगा, राहुल गांधी अपने प्रचार पर विशेष विचार करें, वर्ना जो तेजस्वी यादव बनाकर करेंगे, उसमें लंका लगाने वाली कोई और पार्टी नहीं, बल्कि राहुल गांधी ही होंगे.