राजस्थान का भरतपुर जाटों का गढ़ रहा है. यहां जाटों की आबादी काफी ज्यादा है लेकिन सुरक्षित सीट होने की वजह से यहां मुकाबला दलितों के बीच है. इस लोकसभा सीट पर राजघराने से लेकर कई बड़े नेताओं ने जीत दर्ज की है. कांग्रेस के नटवर सिंह, राजेश पायलट, राजा विश्वेंद्र सिंह और उनकी पत्नी दिया सिंह का नाम उन लोगों में शामिल है जो यहां से सांसद रहे हैं. 2008 में ये सीट सुरक्षित हो गई जिसके बाद यहां 2009 में यहां कांग्रेस ने जीत दर्ज की फिर 2014 में बीजेपी ने मोदी लहर में यहां जीत हासिल की थी. अभी यहां से तीन दलित नेता मैदान में हैं. बीजेपी, कांग्रेस और बीसएपी यहां से मैदान में हैं.

बीजेपी ने यहां से मौजूदा सांसद का टिकट काटकर रंजीता कोहली को उम्मीदवार बनाया है. वो तीन बार के सांसद गंगाराम राम की बहू हैं. कांग्रेस से अभिजीत कुमार जाटव मैदान में हैं वो रिटायर IRS हैं और राजनीति में नए हैं. बीएसपी ने यहां से सूरज जाटव को उम्मीदवार बनाया है. हाल ही में राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस और RLD ने 6 सीटें जीती थीं. बीएसपी ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजेपी को यहां से खाली हाथ रहना पड़ा था. इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक बीएसपी के उम्मीदवार उतारने से यहां कांग्रेस को मुश्किल होगी क्योंकि जाटव वोटरों में अहम बदलाव पैदा करेगा.

भरतपुर को 1992 की उस घटना के लिए भी याद किया जाता है जब जाटों ने 300 जाटव परिवार के घरों में आग लगा दी थी. ऐसे में कांग्रेस के लिए जाट और जाटवों को एक कर पाना मुश्किल होगा. अशोक गहलोत कैबिनेट में मंत्री विश्वेंद्र सिंह यहां जाटों के वोट के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. वो अपनी निजी प्रतिष्ठा के नाम पर वोट मांग रहे हैं. इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में एक स्थानीय नागरिक ने दावा किया कि जातिगत समीकरण यहां कांग्रेस के खिलाफ हैं और बीएसपी उम्मीदवार के वोट काटने से बीजेपी को यहां आसानी होगी.

जहां अभिजीत जाटव रिटायर IRS हैं वहीं बीजेपी उम्मीदवार रंजीता कोहली ने महज मैट्रिक तक पढ़ाई की है. हालांकि जनता को दोनों की शिक्षा से कोई फर्क नहीं पड़ता और इस बारे में वहां कोई बातचीत नहीं हो रही है. देखने वाली बात होगी कि एक रिटायर ब्यूरोक्रेट और दसवीं पास महिला के बीच जंग में कौन जीत दर्ज करता है.