उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में
इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए

मशहूर शायर वसीम बरेलवी ने का शेर इन दिनों भारतीय राजनीति पर एकदम सटीक बैठता है.भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है.इसकी वजह है की भारत में कई मौसम और ऋतुएं होती हैं,लेकिन इन सबके बीच हम सबसे अहम मौसम को भूल जाते हैं. ये मौसम है चुनाव का मौसम. इस मौसम को भारतीय राजनीति में ब्रेकअप और तलाक का दौर तेज हो जाता है. बीते 5 सालों से जारी तमाम विवाहेत्तर संबंध इस दौरान अपने रिश्ते को नया नाम देने का ऐलान कर देते हैं.

चुनाव आने वाला है और भारतीय राजनीति में मिलने बिछड़ने का दौर जारी है. जिसको पुराने रिश्ते में संतुष्टि नहीं मिली वो नए रिश्ते में जा चुका है या जाने वाला है. देश में पांच राज्यों में चुनावों का बिगुल फूंका जा चुका है. ऐसे में कई नेता एक पार्टी से दूसरी में जाना चालू कर चुके हैं. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी से नेताओं का पलायन जारी है. ऐसा लगता है कि यह पलायन बिहार से मजदूरों के पलायन को पीछे छोड़ देगा. ताज़ा और बड़ा हास्यस्पद मामला टीएमसी विधायक जितेंद्र तिवारी का है. महोदय एक दिन पहले ही टीवी पर बैठकर टीएमसी प्रवक्ता के तौर पर बीजेपी को गालियां दे रहे थे और एक दिन बाद ही बीजेपी में शामिल हो गए.

उनसे पहले दिनेश त्रिवेदी समेत टीएमसी के कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं. त्रिवेदी जी ने शायद ममता जी के बंगाल से विदा होने की आहट सुन ली है. ऐसे में 'त्रिवेदी' बचेगा के स्लोगन को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने पार्टी छोड़ दी. लोकसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस से एक बड़ा हास्यस्पद पाला बदल हुआ था. एक कांग्रेसी नेता थे टॉम वडक्कम. कांग्रेस के प्रवक्ता थे. सोनिया गांधी के बड़े खास हुआ करते थे. एक हफ्ते पहले ही ट्वीट करके बोले की चाहें जितने क्राइम करो बस एक बार बीजेपी में डुबकी लगा लो. सारे क्राइम धुल जाएंगे. हफ्ते भर में जनाब को पता नहीं कौन सा ऐसा अपराध याद आ गया की डुबकी लगाने बीजेपी में शामिल हो गए.

ऐसी ही दिल्ली में एक कड़क सिंगल लौंडा हुआ करता था.सारी लड़कियों के चरित्र पर सवाल उठाने वाला लड़का.आपका अपना अरविंद केजरीवाल.आजकल उन्हीं मे से एक लड़की से रिश्ता को आतुर हैं. बीते साल लोकसभा चुनाव में केजरीवाल जी कांग्रेस के साथ गठबंधन करने को आतुर थे, तो इस बार भी महोदय गुजरात जाकर बीजेपी-कांग्रेस के नेताओं को पार्टी में शामिल होने का न्योता दे आए.

बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह को राजनीति के नए रिश्तों का मैरिज ब्यूरो कहा जा सकता है. शानदार ख्वाब के साथ विरोधियों को पाले में लाने की पूरी कोशिश करते हैं. एमपी में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार गिरी और बीजेपी की बन गई. ऐसे ही राजस्थान में सचिन पायलट का जहाज उड़ान भरते भरते रह गया वर्ना वहां भी कांग्रेस की सरकार जाने वाली थी.

आपको इतने रिश्ते टूटने के बारे में मैं बता चुका हूं. अच्छी बात ये है की यहां सबकुछ इंस्टैंट होता है. इस्टैंट तीन तलाक की तर्ज पर एक नेता पार्टी छोड़ता है तो दूसरी पार्टी तुरंत पकड़ लेता है. यहां कोई सिंगल रहने को मजबूर नहीं होता. यहां कोई पुरानी पार्टी से गुजारा भत्ता भी नहीं मांगता. बस नए हमसफर को खुश करने के लिए पुराने को गालियां जरूर देता है. कुल मिलाकर चुनाव के इस मौसम का आनंद लीजिए. चुनाव के मौसम के इस नए सृजन का अपना एक मजा है.