2007 में प्रचंड बहुमत से यूपी की सत्ता संभालने वाली बीसएपी प्रमुख मायावती ने पूरे प्रदेश में खूब अपनी और हाथियों की मूर्तियां बनवाईं.कानून व्यवस्था को लेकर अपने सख्त तेवरों के लिए जानी जाने वाली मायावती ने अपने नाम की योजनाएं भी चलाईं.उस वक्त शायद ही उन्हें पता हो की खुद की जिन मूर्तियों में उन्होंने जो निवेश किया है वक्त के साथ ये बेहद तगड़े ब्याज के साथ उनके पास आने वाला है.दरअसल इस मामले में एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए टिप्पणी की है.कोर्ट का कहना है की हमारा पहला मत है की बीएसपी प्रमुख से उनकी खुद की मूर्तियों और हाथियों की मूर्तियों के निर्माण में लगे धन की वसूली होनी चाहिए.हालांकि ये सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले की आखिरी सुनवाई है.ऐसे में ये टिप्पणी अहम है.बीएसपी के राज्यसभा सदस्य सतीश मिश्रा इस मामले में मायावती का पक्ष रख रहे हैं. उन्होंने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से गुहार लगाई की केस पर फैसला लोकसभा चुनाव के बाद हो लेकिन चीफ जस्टिस ने मामले में फैसले के लिए 2 अप्रैल की डेट दे दी है.

ऐसा माना जाता है की 2016 में यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नोटबंदी में बीएसपी को फंड का काफी नुकसान हुआ था.ऐसे में अगर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ही फैसले के तौर पर लोकसभा चुनाव से पहले सामने आती है तो बीएसपी को एक और करारा आर्थिक झटका लगेगा.दरअसल जिन मूर्तियों के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है उनमें कुल लागत 657 करोड़ की है.इतनी बड़ी धनराशि चुनाव से पहले जुर्माने के तौर पर एक साथ देने का मतलब आर्थिक तौर पर पार्टी की रीढ़ टूटना होगा.कुल मिलाकर सपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रहीं बीएसपी इस झटके से कितना उबर पाती है ये देखने वाली बात होगी.वैसे 2007 में जब जनता मुलायम सिंह के राज में गुंडागर्दी से परेशान हुई तो उसने मायावती को सत्ता की चाभी सौंप दी.लंबे अरसे बाद यूपी में कोई पूर्ण बहुमत की सरकार आई थी लेकिन उनका मूर्ति प्रेम,अपना गाथा गान उन्हें और प्रदेश दोनों को ले डूबा.इतना ही नहीं अवैध खनन से लेकर एनआरएचम तक में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए.राजधानी लखनऊ में ही NRHM घोटाले से जुड़े दो सीएमओ की हत्या हुई और एक का शव संदिग्ध हालात में मिला

गरीबों और दलितों की आवाज होने का दावा करने वाली मायावती जी के राज में गरीबों का तो भला नहीं हुआ लेकिन मूर्तियां और पार्क बेशुमार बनवाए गए.एक तरफ गरीब जनता के लिए चलाए गए NRHM में घोटाला हो रहा था तो दूसरी तरफ मायावती जी के राज में बनवाए गए हाथी जनता का मजाक उड़ा रहे थे.कुल मिलाकर बीएसपी प्रमुख ने पूरी सीख देने की कोशिश ऐसी दी की प्रदेश की जनता दोबारा सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत ही न दे.लेकिन भला हो जनता का की खराब शासन व्यवस्था के बावजूद दो पार्टियों को पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने का मौका दिया.मायावती और उनके तमाम सहयोगी सामाजिक न्याय की राजनीति करने का दावा करते हैं लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट अपनी टिप्पणी को फैसले में बदल देता है तो ये अपने किस्म सबसे शानदार सामाजिक न्याय होगा.