मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हाल में हुये विधानसभा चुनावों में सत्ता गंवाने के बाद केंद्र सरकार किसानों की बदहाली पर ध्यान केंद्रित कर रही है. .मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो केंद्र सरकार उन किसानों से कृषि कर्ज पर ब्याज लेना बंद कर सकती है जो समय पर अपनी कर्ज किस्त का भुगतान करते हैं. इससे सरकारी खजाने पर 15 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

खास बात ये है की बीते चार साल में सरकार ने किसानों के लिए कुछ खास कदम नहीं उठाए और अब जब लोकसभा चुनाव दरवाजों पर दस्तक दे चुकें हैं तो बीजेपी को किसानों की याद आ रही है. पिछले कुछ दिनों के भीतर इस बारे में बैठकों के कई दौर चले हैं. इन बैठकों में ज्यादा फसल उत्पादन के बाद किसानों को सही कीमत नहीं मिल पाने की समस्या को दूर करने की योजना पर चर्चा की गयी.

आपको बता दें की हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक में प्याज की ज्यादा फसल होने के बाद ऐसे कई मामले सामने आए जब किसानों ने प्याज को सड़कों पर फेंक दिया.एक किसान ने प्याज की फसल बेचकर मिली मामूली रकम को पीएम राहत कोष तक के लिए भेज दिया था.इसी तरह एमपी के छिंदवाड़ा में टमाटर की ज्यादा फसल होने पर फसल को खेत से ही फेंक देने का मामला सामने आया था.

किसानों को तुरंत राहत देने के लिए सही समय पर कर्ज की किस्त चुकाने वाले किसानों पर चार फीसदी ब्याज का भार पूरी तरह से समाप्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है.अभी किसानों को तीन लाख रुपये तक का कर्ज सात फीसदी की ब्याज दर से दिया जाता है. समय पर ब्याज भरने वाले किसानों को सरकार की तरफ से पहले ही तीन फीसदी की छूट दी जाती रही है.

सरकार ने चालू वित्त वर्ष में किसानों को 11 लाख करोड़ रुपये का कर्ज देने का बजट लक्ष्य तय किया है. पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने 10 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य पार कर किसानों को 11.69 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया था. केंद्र सरकार इस समय सामान्य रूप से किसानों को ब्याज की दो फीसदी सहायता और समय पर भुगतान करने पर ब्याज की पांच फीसदी की सहायता योजना पर सालाना करीब 15 हजार करोड़ रुपये का खर्च वहन करती है.यदि समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को पूरी की पूरी ब्याज के बराबर सब्सिडी दी जाए तो यह बोझ बढ़कर 30 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा.

रिपोर्ट्स के अनुसार खाद्यान्न फसलों के बीमा पर प्रीमियम को भी पूरी तरह से माफ करने का प्रस्ताव है. बागवानी फसलों की बीमा का प्रीमियम भी कम किया जा सकता है.