अमृतसर में हुए भीषण हादसे के बाद आरोपों का दौर जारी है। घटना से जुड़ा हुआ हर व्यक्ति अपनी जिम्मेद्दारी से बचने के लिए दूसरे पर आरोप मढ़ने की कोशिश कर रहा है। सिद्धू परिवार बड़ी ही चालाकी से रेलवे पर आरोप लगा के बच निकलने की कोशिश में है। नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने बयान में कहा की किसी ने भी जानबूझकर ये घटना नहीं की है पर ट्रेन की स्पीड ज्यादा थी और उसने हॉर्न नहीं दिया। उनकी पत्नी का भी कमोबेश यही कहना है। उनकी पत्नी पर हादसे के वक्त मौके से भागने के आरोप लगे अब ये आरोप कितने सही है या गलत ये वही जानती होंगी।

जिस तरह से ये दर्दनाक हादसा हुआ है उसमे पब्लिक सुरक्षा का जो स्तर मौजूदा समय में है उनकी पोल खुल जाती है। इस घटना में लापरवाही के दो पहलू है।

1- प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही- प्रशासनिक स्तर पर जब लापरवाही की बात हम करते है तो सबसे पहले आयोजन स्थल की बात आती है। जब इस तरह का धार्मिक उत्सव का आयोजन हो रहा हो जंहा पर सभी जानते है की भारी तादाद में भीड़ जमा होगी तो आयोजन के लिए व्यस्त रेलवे ट्रैक के पास जगह का चुनना। ऐसे आरोप लग रहे है की मुख्य आयोजनकर्ता नवजोत सिंह सिद्धू का खास आदमी है। सिद्धू परिवार पंजाब की राजनीति में खासा ताकतवर परिवार है। ऐसे में हम सभी जानते है की पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने शायद ही आयोजन की अनुमति या पब्लिक सुरक्षा से जुड़े किसी भी पहलू का कोई ध्यान रखा हो। अभी तक की जाँच और रेलवे के आला अधिकारियों के बयान के हिसाब से रेलवे को इस तरह के आयोजन की कोई जानकारी नहीं थी और ये स्थल एक प्राइवेट प्रॉपर्टी थी। रेलवे ट्रैक के नजदीक इस तरह के आयोजन से पहले अगर रेलवे को आगाह कर दिया गया होता तो इस दर्दनाक हादसे से बचा जा सकता था।

२- पब्लिक सुरक्षा के प्रति हमारा ख़राब रवैया- प्रशासनिक स्तर पर मुस्तैदी से इस घटना से निश्चय ही बचा जा सकता था पर जब आप एक समाज का हिस्सा है तो व्यक्तिगत स्तर पर आप की अपनी भी जिम्मेदारी है हर बात पर आप सरकार या समाज को कोसते हुए अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। हम सभी के अंदर रेलवे ट्रैक को लेकर एक अजीब सी लापरवाही है। ओवर ब्रिज बने होने के बाद भी लोग पुल पर चढ़ के ट्रैक को क्रॉस करना जरूरी नहीं समझते। मौका दिखा नहीं की लगे रेलवे ट्रैक पार करने। वो भी ये तब है जब अक्सर रेलवे ट्रैक पर मल मूत्र पड़ा रहता है। सरकारी लापरवाही दुरुस्त होनी चाहिए पर जब आप रेलवे ट्रैक पर खड़े हो कर इस तरह के शोर गुल से भरे प्रोग्राम देखते है या आलस्य के कारण पुल पर न चढ़ के सीधे ट्रैक क्रॉस करने की कोशिश करते है तो उस समय होने वाले हादसे में जान आपकी जाएगी। सरकार की जान नहीं जाएगी। थोड़े दिन लोग सरकार को कोसेंगे, नेता कुछ लाख रुपया आपके परिवार को मुआवजा दे कर निकल जायेंगे। परिवार आपका तबाह हो जायेगा। अमृतसर हादसे में कुछ ऐसे परिवार भी है जिनमे माँ बाप दोनों ही मारे गए और छोटे छोटे बच्चे बचे है। क्या चन्द लाख रूपये उन बच्चो के माँ बाप की कमी पूरी कर पाएंगे। कम से कम अपनी जान की कीमत न समझे तो अपने परिवार के बारे में ही सोंचे और इस तरह की लापरवाही न करें।