एक शानदार टेबल है, जिस पर बिसलरी की पानी की बोतल रखी है, काजु कतली रखी है, और भी खाने पीने का कुछ आइटम सजा रखा है जो समझ नहीं आ रहा है. एक बढ़िया सोफेनुमा कुर्सी पर बैठे यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव नजर आ रहे हैं. दरअसल ये टेबल के एक साइड का दृश्य था. टेबल की दूसरी साइड कुछ साधारण से पहनावे वाली औरतें दिख रहीं हैं जो सभी जमान पर बैठी हैं, जो बेहद दुखी नजर आ रही हैं और उम्मीदभरी नजरों से अखिलेश यादव को देख रही हैं. इस दृश्य को आम समझना या सिर्फ अखिलेश यादव से जोड़कर देखना गलत होगा. दरअसल देश के अधिकतर राजनेताओं की सच्चाई यही है.

पीड़ित परिवार और अखिलेश यादव के बीच रखी टेबल, सिर्फ एक टेबल नहीं है वो एक बड़ी खाई है. जो भारतीय राजनेताओं और समाज के बीच बन चुकी है. हमारे नेता न केवल आरामतलब हो चुके हैं बल्कि इसका बेशर्मी से प्रदर्शन करने में भी वो पीछे नहीं हैं. अखिलेश यादव कल यूपी के जौनपुर के दौरे पर थे. वहां उन्होंने पुलिस हिरासत में मारे गए एक शख्स के परिजनों से मुलाकात की. अखिलेश यादव का यह 'इवेंट' कराने वाले मैनेजरों ने अपने 'समाजवादी' नेता के आराम और आतिथ्य का पूरा ख्याल रखा. आखिर ध्यान रखा भी क्यों न जाता, ऑस्ट्रेलिया से पढ़ने वाले और हॉलैंड और इंग्लैंड में छुट्टियां बिताने वाले अखिलेश यादव आखिरकार इतने दिनों के बाद जनता के बीच पहुंचे थे.

सबसे बड़ी बात यह है कि शागिर्दों को तो छोड़िए खुद अखिलेश जी को भी यह सब बहुत नॉर्मल लगा. उन्होंने कुछ 'संघर्षवादी' पंक्तियों के साथ यह तस्वीर ट्वीटर पर शेयर की. इस तस्वीर के साथ 'नेताजी' के बेटे ने एक और तस्वीर शेयर की है. किसी लग्जरी गाड़ी के गेट पर खड़े अखिलेश भइया हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे. आस-पास भीड़ खड़ी है. ऐसा उल्लास दिख रहा है कि मानो नेताजी चुनाव जीतने के बाद रोड शो कर रहे हों.

ये तस्वीरें बताती हैं अखिलेश यादव और उनकी पार्टी राजनीति तो छोड़िए सामान्य शिष्टाचार भी भूल चुकी है. लोगों को देखिए, इनके सहारे यूपी में इंकलाब लाने का ख्वाब संजोते हैं. बीजेपी को उखाड़ फेंकने का दंभ भरते हैं. ऐसा नहीं है कि बीजेपी के नेता जनता के बीच ही बैठे रहते हैं या वो ऐसी हरकतें नहीं करते, लेकिन दिक्कत यह है कि जब विपक्ष में होने पर अखिलेश यादव इतने लापरवाह और आरामतलब हो सकते हैं तो सत्ता में आने पर क्या करेंगे? जब हाथरस में पुलिस ने बगैर परिजनों की अनुमति के रेप पीड़िता के शव जलाया और विवाद हुआ, तो अखिलेश जी लंदन में बैठकर ट्वीट कर रहे थे, हां उनकी पार्टी के कार्यकर्ता जरूर पुलिस की लाठी खा रहे थे. पिछले दिनों में जब-जब जनता को विपक्ष के तौर पर अखिलेश यादव की जरूरत पड़ी है वो ट्वीटर पर ट्वीट करते ही नजर आए हैं.

लोग कहते हैं कि भारत में विपक्ष में खत्म हो गया है. दरअसल भारत में विपक्ष खत्म नहीं हुआ है, बल्कि पक्ष-विपक्ष सब एक जैसे हो गए हैं- संवेदनहीन. सत्ता के पास तो सत्ता है, इसलिए वो मारक नजर आती है और विपक्ष निरीह नजर आने लगता है. दिक्कत ये है कि अखिलेश और पीड़ित परिवार की महिलाओं के बीच की टेबल रूपी खाई को भरने की ज़रूरत कोई नहीं समझता. अब नेता जब खुद ही फोटो ट्वीट करने लगे तो समझ जाना चाहिए कि हालात क्या हैं.