हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डाना -फर्बर कैंसर इंस्टिट्यूट के डॉक्टर ज्यॉफ्री ओक्सनार्ड ने अपनी रिसर्च में बताया है की एक ही ब्लड टेस्ट से 20 तरह के कैंसर का शुरुआती अवस्था में पता लग जायेगा और उन्हें पूरी तरह से ठीक करने में बड़ी सफलता मिलेगी।

ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ में छपे लेख के अनुसार जब कैंसर पनपना शुरू होता है तो उसके साथ होने वाले जीन में बदलाव को इस टेस्ट के माध्यम से पहचाना जा सकता है। इससे कैंसर का शुरुआती अवस्था में ही पता चल जायेगा। जिससे कैंसर का इलाज रोग के फैलने से पहले ही शुरू कर दिया जायेगा।

कैंसर के इलाज में सफलता का प्रतिशत इस बात पर निर्भर करता है की रोग का पता किस अवस्था में चला है। शुरुआती अवस्था में अगर रोग की पहचान हो जाती है तो कैंसर को शत प्रतिशत ठीक किया जा सकता है। हालांकि मौजूदा समय में कैंसर का पता मुख्यता तीसरी और चौथी अवस्था में लगता है और ऐसे में रोगी का ठीक हो पाना लगभग नामुमकिन जैसा हो जाता है।

इस टेस्ट के माध्यम से रिसर्च के दौरान एक तिहाई लोगों को जो की पहली अवस्था के कैंसर के मरीज थे और तीन चौथाई लोगों को दूसरी अवस्था में पहचान लिया गया। सबसे महत्पूर्ण बात ये भी है की इस टेस्ट के माध्यम से कैंसर के सोर्स का पता भी 90 प्रतिशत तक शुरूआती अवस्था में ही लगा लिया गया। जो की गर्भाशय और अग्नाशय के कैंसर में पता लगा पाना करीब करीब असंभव होता है।