कोरोना वायरस से लड़ रही दुनिया में बीच बीच में कुछ अन्य संक्रामक बीमारियां अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। कभी कुछ नए वायरस की मौजूदगी का पता लगता है तो कंही पर सदियों पुरानी घातक बीमारियां चर्चा में आ जाती है। अभी हाल ही में मंगोलिया के ग्रामीण इलाकों में बूबोनिक प्लेग की मौजूदगी का पता लगा था।

पश्चिमी मंगोलियन प्रान्त के ग्रामीण इलाके में रहने वाला 15 वर्षीय नवयुवक की मौत तब हो गयी जब उसने खाने में मारमोट (चूहे और गिलहरी की प्रजाति) का मांस खाया था। मांस खाने के बाद युवक में प्लेग के लक्षण देखे गए और जाँच में बूबोनिक प्लेग की पुष्टि की गयी है। युवक के परिवार और नजदीकी लोगों को हॉस्पिटल में अकेले में रखा गया है। हालांकि गांव के किसी अन्य व्यक्ति में अभी तक प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है।

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युवक के परिवार को एंटीबायोटिक उपचार दिया जा रहा है साथ ही पूरे इलाके में 6 दिन के लिए सम्पूर्ण लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है। युवक की मौत से पहले 2 अन्य मामलों में प्लेग की पुष्टि की गयी थी।

बूबोनिक प्लेग एर्सीनिअ पेस्टिस नाम के बैक्टीरिया से होने वाली बेहद घातक बीमारी है। समय पर इलाज मिलने पर मृत्यु का दर 10 प्रतिशत और समय पर इलाज न मिलने पर 90 प्रतिशत मृत्यु दर है। प्लेग का बैक्टीरिया ज्यादातर चूहे, गिलहरी प्रजाति में पाया जाता है। अधिकतर मामलों में इन जानवरों पर रहने वाले छोटे कीड़े भी बैक्टेरिया से संक्रमित रहते है और जब ये किसी व्यक्ति को काट लेते है तो व्यक्ति भी इससे संक्रमित हो जाता है। कुछ इलाकों जंहा चूहे, गिलहरी या मारमोट के मांस को खाया जाता है उन इलाकों में प्लेग फैलने की आशंका सबसे अधिक रहती है। कई मामलों पाया गया है की पालतू चूहे, बिल्ली अगर इस बीमारी से संक्रमित हो जाये और कोई स्वस्थ व्यक्ति उन्हें छुए तो वह भी बीमारी से ग्रस्त हो जाता है।

दुनियाभर में हर साल बूबोनिक प्लेग के कुछ सौ केस हर साल आते है। जिनमे से अधिकांश एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होते है। मंगोलिया में हर साल कम से कम एक व्यक्ति प्लेग से मारा जाता है जबकि सरकार हर साल मारमोट के मीट को खाये जाने के खिलाफ अभियान चलाती है। मंगोलिया के ग्रामीण इलाके में ऐसी मान्यता है की मारमोट का मीट खाने पर शरीर में आतंरिक मजबूती आती है। पिछले साल एक पति पत्नी की मौत तब हो गयी थी जब उन्होंने मारमोट के कच्चे मीट को खा लिया था।

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इसी महीने की शुरुआत में चीन के आंतरिक मंगोलियन इलाके से भी बूबोनिक प्लेग के कई मामले सामने आये थे जिसके बाद पूरे इलाके में मारमोट और उसके प्रजाति के जानवरों के शिकार, मांस खाने या बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी जांच के बाद कहा है की बीमारी पूरी तरह से नियंत्रण में है और व्यापक रूप से फैलाने की आशंका नहीं है।

चीन और मंगोलिया से बूबोनिक प्लेग की खबरों के बीच रूस ने पश्चिमी साइबेरिया के प्रान्त में मारमोट के शिकार या उसके मीट खाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। रूस के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा की ऐसे कदम बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए एतिहातन उठाये जा रहे है। रूस में अभी हाल फिलहाल प्लेग का कोई मामला सामने नहीं आया है।

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चीन और मंगोलिया के बाद अमेरिका के कॉलोराडो राज्य में गिलहरियों में प्लेग की पुष्टि हुई है। जेफ़र्सन काउंटी के स्वास्थ्य अधिकारी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा की यह काउंटी का पहला मामला है। मृत गिलहरी को उस समय जाँच के लिए भेजा गया जब एक व्यक्ति ने इलाके में 15 से ज्यादा गिलहरियों को मृत पाया।

बूबोनिक प्लेग के बैक्टेरिया से संक्रमित होने के 2 से 7 दिनों के अंदर तेज बुखार, सर्दी लगना, हाथ पैरों में दर्द और लसीका ग्रंथियों में सूजन होने जैसे लक्षण दिखाई देते है और समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की मृत्यु हो जाती है। 14 वीं शताब्दी में बूबोनिक प्लेग को ब्लैक डेथ के नाम से जानते थे और मानव इतिहास में इसे अब तक की सबसे खतरनाक महामारी माना जाता है। उस समय दुनियाभर में लगभग 20 करोड़ लोग बूबोनिक प्लेग से मारे गए थे।