कोरोना के केस और उससे मरने वाले लोगों की संख्या भारत में बढ़ती जा रही है. आंकड़े रोज, कोरोना के कहर की गवाही दे रहे हैं. इसी बीच लोगों की सावधानी, कोरोना केस के साथ घटती जा रही है. लोग बड़े आराम से सफर कर रहे हैं. जहां मन हो रहा है वहां जा रहे हैं. बीते दिनों मुंबई लोकल का एक वीडियो वायरल हुआ जो बिल्कुल आम दिनों की तरह ही खचाखच भरी थी. लोगों को कहा गया, कोरोना के साथ जीना सीखना होगा लेकिन लगता है लोगों ने मौत के साथ जीना सीख लिया है.

लोगों के आस-पास ही किसी की कोरोना से मौत हो जाती है और लोग उसके बावजूद पहले की तरह ही घूमते रहते हैं. कोई जरूरी नही है कि मास्क लगाया जाए या बाकी सावधानी रखी जाए. कोरोना के शुरूआती दिनों में लॉकडाउन लगाया गया. पीएम मोदी ने खुद लोगों से घरों में रहने की अपील की. काफी हद तक लोगों ने माना भी. सरकार को अंदाजा था कि लॉकडाउन के दिनों में ही कोरोना को कंट्रोल कर लिया जाएगा. इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि पीएम मोदी ने कोरोना से मरने वाले लोगों के लिए 4 लाख की मदद देने का ऐलान किया था. शायद वो इसके इतने भयावह स्वरूप का अंदाजा लगा ही नहीं पाए. आज भारत के गांव-गांव में कोरोना फैला है. तमाम लोग घरों, या प्राइवेट अस्पतालों में बगैर कोरोना की जांच के बिना ही दम तोड़ रहे हैं. सरकार की तरफ मोदी जी अक्सर लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग बनाने की अपील करते हैं लेकिन इससे ज्यादा सरकार अब कहीं दिखाई नहीं दे रही.

शायद कोरोना से मरना या बचना, अब पूरी तरह से अपने ऊपर है लेकिन सरकार को एक बार किनारे रखकर, इस सब कुछ को देखें. लोग मी़डिया और माहौल से कितना प्रभावित होते हैं. जब केस कम थे, तब सभी लोग कोरोना से डरकर घर पर बैठे थे. मीडिया पर दिन भर कोरोना की कवरेज चलती थी. उस दौरान बाहर निकलने वाले लोगों में सिर्फ़ मजबूर मजदूर या बेहद ही अड़ियल किस्म के लोग थे. जैसे जैसे मीडिया ने कोरोना से ध्यान हटाया, लोगों का ध्यान भी हटता चला गया. आज किसी को कोरोना की परवाह ही नहीं, बावजूद के आपके आस-पास के लोग ही कोरोना का शिकार हो रहे हैं. बीते दिनों टाइम्स पत्रिका ने पीएम मोदी को दुनिया के प्रभावशाली लोगों की सूची में जगह देते हुए लिखा कि उन्होंने महामारी का इस्तेमाल विरोध को दबाने के लिए किया. भला उस देश में कोई सत्ता किसी विरोध को कैसे दबा सकती है जहां के लोग मौत से डरना भी भूल चुके हों. अनलॉक की प्रक्रिया से पहले ही लोग निकलने लगे थे और थोड़े दिन और सब कुछ न खोला जाता तो शायद लोग अपने-आप ही अनलॉक कर देते. इस सब को देखकर लगता है कि भारत के लोग किसी से नहीं डरते, उनके बस अपने एजेंडे हैं. वो एजेंडे पूरे होने चाहिए.

निडर होना अच्छी बात है लेकिन मूर्ख होना गलत बात है, खासतौर पर अगर जानबूझकर मूर्खता की जाए. अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है इसलिए सरकार लॉकडाउन या ज्यादा पाबंदिया नहीं लगाएगी लेकिन लोगों को तो सावधानी रखनी चाहिए. आपका अगर कोई अपना जाएगा तो क्या आप सरकार को दोष देकर मुक्त हो जाएंगे. बेहतर है कि लोग थोड़ा सा सावधानी रखें. सरकार के भरोसा कम, अपना भरोसा ज्यादा करें.