एचआईवी संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य तौर पर फ्लू के संक्रमण जैसे ही होते है। जब कोई व्यक्ति एचआईवी वायरस के संपर्क में आता है तो उसे बुखार, गले में खराश और थकान जैसे लक्षण हो सकते है। एड्स और एचआईवी को लेकर लोगों में तमाम तरह की गलत जानकारियां है।

एचआईवी वायरस से किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं होती है, वयक्ति की मौत तब होती है जब एचआईवी संक्रमण के कारण व्यक्ति एड्स पीड़ित हो जाता है। एड्स हो जाने पर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता लगभग समाप्त हो जाती है। रोगी को डायरिया, टीबी और निमोनिया जैसे रोग घेर लेते है। एड्स के लक्षण में बार बार डायरिया, अलग अलग तरह के संक्रमण होना, रात्रि में सोने हुए पसीना आना आदि है। एड्स का कोई इलाज नहीं है, हालांकि कुछ दवाइयों से इसे कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है।

पर एचआईवी को एंटी वायरल दवाई से कंट्रोल किया जा सकता है और एड्स से बचा जा सकता है। आधुनिक एंटी वायरल दवाईयों से शरीर में मौजूद एचआईवी वायरस के लोड को बेहद ही नीचे स्तर पर पंहुचा दिया जाता है। जिससे वह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान नहीं पंहुचा पाता।

सही समय पर इलाज से वायरस का लोड इतना कम हो जाता है की व्यक्ति अगर असुरक्षित सेक्स करता है तब भी वह किसी को संक्रमित नहीं कर सकता है। यंहा तक की एंटी वायरल ट्रीटमेंट से गुजर रहे व्यक्ति का ब्लड टेस्ट भी नेगेटिव देखा गया है। इस तरह से रोगी एक सामान्य जीवन जी सकता है।

पर इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बात है वह यह है की संक्रमित व्यक्ति का टेस्ट एड्स होने से पहले होना चाहिए। एचआईवी संक्रमण ज्यादातर मामले में बिना किसी लक्षण वाला होता है इसलिए मरीज को संक्रमण का पाता तब तक नहीं चलता जब तक उसे एड्स न हो जाये। एक बार एड्स हो जाने पर उसका इलाज संभव नहीं हो पाता। इसलिए अगर व्यक्ति के एक से ज्यादा लोगों से यौन सम्बन्ध रहे है या किसी ऐसे व्यक्ति से असुरक्षित सेक्स किया है जिसे एचआईवी होने का शक है अथवा व्यक्ति एक ही सिरिंज से ड्रग्स लेने का आदी रहा है तो उसे फ़ौरन एचआईवी वायरस का टेस्ट कराना चाहिए।

अगर संक्रमण का शुरूआती अवस्था में पाता चल जाता है तो वह व्यक्ति एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है। इसलिए एचआईवी संक्रमण में टेस्टिंग बहुत ही महत्वपूर्ण है। आजकल कई तरह के टेस्ट मौजूद है जिनसे सटीक तरीके से एचआईवी संक्रमण का पता लगाया जा सकता है।

एंटीबाडी टेस्ट- जैसा की नाम से ही पता लग रहा है इस टेस्ट में उस प्रोटीन की पहचान की जाती है जो संक्रमित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर में वायरस के प्रवेश के बाद बनाना शुरू कर देता है। ये टेस्ट एलिसा टेस्ट के नाम से भी जाने जाते है और बेहद सटीक होते है। पर कई बार व्यक्ति द्वारा ऐसा व्यवहार जिससे उसके एचआईवी संक्रमित होने की आशंका हो करने के तुरंत बाद टेस्ट करने पर यह टेस्ट नेगेटिव आ सकता है क्यों की शरीर को एंटीबाडी बनाने में संक्रमण के बाद 3 महीने तक का समय लगता है। इस लिए यह टेस्ट कम से कम 3-4 महीने बाद करवाए।

एंटीबाडी एंटीजन टेस्ट- यह एचआईवी वायरस के पार्ट प२४ का पता लगता है जो की शरीर में 2 से 4 हफ्ते में बनने लगता है। जिससे इस टेस्ट के द्वारा सटीक और बेहद जल्दी शरीर में वायरस का पता लगाया जा सकता है। अमेरिका में एचआईवी संक्रमण का पता लगाने के लिए इसी टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

न्यूक्लिक एसिड टेस्ट- इस टेस्ट में डायरेक्ट वायरस का पता लगाया जाता है। यह टेस्ट महंगा होता है और डॉक्टर उसी को यह टेस्ट कराने के लिए कहते है जिसे एचआईवी के लक्षण दिख रहे हो और मरीज हाई रिस्क पर हो।

घर में किये जाने वाले टेस्ट - दुनिया के कई देशों में घर पर ही खुद टेस्टिंग की सुविधा भी मौजूद है। कोई भी व्यक्ति जिसे एचआईवी संक्रमण का शक हो वह घर पर किट ला कर मुँह के लार से टेस्ट कर सकता है। अमेरिकी दवा नियामक ने ऐसे कई टेस्ट को मंजूरी दे रखी है। हालांकि टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।