संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से आने वाले समय में बंगाल टाइगर की प्रजाति खत्म हो सकती है. बंगाल टाइगर की प्रजाति दुनिया की उन पांच लाख प्रजातियों में शामिल है जिस पर जलवायु परिवर्तन के कारण लुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है. वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तव के कारण समुद्र के बढ़े जलस्तर की वजह से ऐसा हो सकता है.

बंगाल टाइगर की प्रजाति भारत और बांग्लादेश के 4000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले सुंदरबन में पाई जाति है. यहां और भी तमाम प्रजातियां पाई जाती हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक सुंदरबन का 70 फीसदी से ज्यादा का हिस्सा समुद्र के स्तर से कुछ फीट ही ऊपर है. पृथ्वी का तापमान बढ़ने के कारण समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा ऐसे में सुंदरबन का ये क्षेत्र आसानी से डूब सकता है. 10 रिसर्चरों की स्टोरी के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से 2070 तक सुंदरबन में बंगाल टाइगर की प्रजाति खत्म हो जाएगी

बीते साल अक्टूबर में आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन अगर ऐसे ही जारी रहा तो 2040 तक पृथ्वी के तापमान में 2.7 फॉरेहाइट का इजाफा हो जाएगा. इससे फूड चैन, कॉरल रीफ और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ेगा. बांग्लादेश जैसे उन देशों पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा जो गरीब हैं और आकार में छोटे हैं लेकिन इनकी जनसंख्या बहुत ज्यादा है.

2010 में वर्ल्ड वाइड फंड की एक स्टडी के मुताबिक समुद्र के जलस्तर में 11 इंच के इजाफे से सुंदरबन के बंगाल टाइगरों की आबादी कुछ ही दशकों में 96 फीसदी तक कम हो सकती है.जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया के आधे से ज्यादा स्तनधारियों की आबादी को हानि पहुंची है. सुंदरबन पर अध्ययन करने वाले शरीफ ए मुकुल की रिपोर्ट कहती है कि 2050 से 2070 के बीच बंगाल टाइगरों की आबादी में 5.4 फीसदी से 11.3 फीसदी तक की कमी आ सकती है. खास बात ये है कि शरीफ ने अपने अध्ययन को समुद्र के ब़ढ़े जलस्तर से अलग खतरों पर केंद्रित करके रखा है. रिपोर्ट के मुताबिक सुंदरबन के इन टाइगरों के जलवायु परिवर्तन से जुड़े अन्य तथ्यों से ज्य़ादा खतरा है.

मुकुल ए शरीफ अपनी रिपोर्ट में ये भी लिखते हैं कि अगर बीच में चक्रवाती तूफान जैसी आपदा, महामारी, खाने की कमी हुई तो सुंदरबन के हालात और भी खराब हो सकते हैं. आपको बता दें कि सन 1900 के बाद से शिकार, अवैध और टाइगर के शरीर के हिस्सों के व्यापार की वजह से दुनियाभर में इनकी आबादी 1 लाख से घटकर 4 हजार हो गई है.