बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर बहुत जोर शोर से बहस हो रही है. सोशल मीडिया पर हर दिन ही इसको लेकर कोई न कोई चर्चा होती है. बॉलीवुड में भी लगातार इसे लेकर तीखी नोकझोक हो रही है. इस पूरी बहस के केंद्र में एक बड़ा सवाल सामने आता है कि आखिर नेपोटिज्म की शुरुआत किसने की ?

नेपोटिज्म किसी भी सेक्टर में कैसे आता है? आज के नेपोटिज्म की चर्चा के केंद्र में अनन्या पांडे, आलिया भट्ट या ऐसे कलाकार हैं जिनके मां बाप पहले से बॉलीवुड में थे लेकिन आखिर इनके मां बाप तो नेपोटिज्म से बॉलीवुड में नहीं आए थे. उन्होंने किस तरह से नेपोटिज्म को बढ़ावा दिया और क्या चंद लोगों का नाम लेने भर से नेपोटिज्म खत्म होने वाला है.

बॉलीवुड में नेपोटिज्म कहां से आता है, इसका जवाब राजनीति से मिल सकता है, महाभारत से मिल सकता है और हमारे आपके सामान्य जीवन से मिल सकता है. संतान के मोह में, कई बार लोग चाहते हैं कि वो उनकी ही विरासत संभाले. ऐसे में संघर्ष भी कम होगा और अपनी विरासत भी दूसरे के हाथ जाने से बच जाएगी. देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी इस विचाराधारा पर लगातार चल रही है. आज बॉलीवुड में वो तमाम पुराने एक्टर्स निशाने पर हैं

जिनके बच्चे बॉलीवुड में काम कर रहे हैं लेकिन इन सभी लोगों का अपना एक संघर्ष रहा है, बॉलीवुड में आने का. अगर पृथ्वीराज कपूर के कपूर खानदान को छोड़ दें, तो बाकी लोगों की पीढ़ियों से एक्टर या डायरेक्टर बॉलीवुड में नहीं थे. ये लोग खुद बॉलीवुड में आए, मेहनत से मुकाम बनाया और इस दौरान निश्चिच तौर पर भेदभाव झेला होगा लेकिन फिर भी अपने बच्चों को बॉलीवुड में भेजा. आज के दौर में मशहूर अभिनेता आमिर खान का उदाहरण हमारे सामने है. आमिर खुद के दम पर बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट बने लेकिन उनके भांजे इमरान खान की बॉलीवुड में एंट्री हुई. इमरान को सफल अभिनेता के तौर पर नहीं जाना जाता. जैकी श्राफ अपने संघर्षों के बारे में अक्सर बताते हैं लेकिन उनका बेटा आज नेपोटिज्म की वजह से सोशल मीडिया के निशाने पर रहता है.

महानायक अमिताभ बच्चन के परिवार से एक्टिंग में कोई नहीं था वो खुद आए, राजेश खन्ना के बाद दूसरे सुपरस्टार कहलाए लेकिन उनका बेटा बॉलीवुड में उन्हीं की वजह से जाना जाता है. राजेश खन्ना की बात करें तो उनकी बेटी ट्विंकल भी फिल्में पर्दें पर आईं जबकि राजेश की पत्नी डिंपल भी बड़े संघर्षों के बाद बॉलीवुड में जगह बना पाईं थीं. इस मामले में कुछ अपवाद भी हैं, अभिनेता अंबरीश पुरी ने अपने बेटे को बॉलीवुड में नहीं आने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इंड्रस्ट्री अच्छी नहीं है. उनके बेटे आज नेवी में काम कर रहे हैं.

अभिनेता शेखर सुमन आज कल नेपोटिज्म के खिलाफ बड़े मुखर रहते हैं लेकिन उनके बेटे को भी कंगना रनौत के अपोजिट फिल्म राज के पार्ट 2 में काम करने का मौका मिला था. अध्ययन सुमन उसके बाद गायब हो गए. शायद उनमें वो काबिलियत ही नहीं थी कि बॉलीवुड में टिक पाते. खास बात ये है कि नेपोटिज्म पर बात करते हुए शेखर, अपने संघर्षों के बारे में बात करते हैं.

नेपोटिज्म की दिक्कत यहीं पर है कि इसे उन लोगों ने ही ज्यादा फैलाया है जो अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़े थे. आज कंगना रनौत भले ही इस मामले पर खुलकर बोल रही हों लेकिन बाकी तमाम लोग इसी वजह से और भी चुप रहते हैं क्योंकि सबको भविष्य के बारे में भी देखना है. नेपोटिज्म एक व्यवहारिक दिक्कत है और इसे कोई कानून बनाकर खत्म नहीं किया जा सकता. इसके लिए, एक व्यवहारिक तौर पर ही आगे बढ़ना होगा. नेपोटिज्म पर आज भले ही बहुत बड़ी चर्चा चल रही है और उम्मीद लगती है कि शायद कुछ बदले लेकिन बदलाव मुश्किल है क्योंकि, इस बदलाव जिनको लाना चाहिए वही इसे फैलाते रहे हैं.