दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में चीन और भारत का नाम सामने आता है. दोनों देशों में आर्थिक विकास की गति की काफी तेज है, यही वजह है कि दोनों देशों में अमीरों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. दोनों देशों में करोड़पति और अरबपतियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. अफ्रीकन-एशियन बैंक की मानें तो चीन और भारत दुनिया के उन शीर्ष दो देशों में हैं जिनमें आने वाले 10 सालों में नए बनने वाले अरबपतियों की संख्या सबसे ज्यादा होगी.

अफ्रीकन एशियन बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले 10 सालों में चीन में सबसे ज्यादा नए अरबपति होंगे. चीन के बाद इस सूची में भारत दूसरे नंबर पर होगा. इन दोनों देशों के बाद महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका का नंबर आएगा. हालांकि चीन इस सूची में भारत से कहीं ज्यादा आगे है. रिपोर्ट के मुताबिक में चीन में आने वाले 10 साल में नए 448 अरबपति होंगे वहीं भारत में इनकी संख्या 238 होगी. इन दोनों देशों के बाद अमेरिका का नंबर आएगा जहां 147 नए अरबपति बनेंगे. एक और महाशक्ति रूस का नंबर अमेरिका के बाद आएगा और यहां 63 नए अरबपति बनेंगे.

सूची में शामिल अन्य देशों की बात करें तो रूस के बाद ऑस्ट्रेलिया का नाम आता है जहां 25 नए लोग अरबपति बनेंगे. हांगकांग इस सूची में 6वें नंबर पर है जहां 22 लोग नए अरबपति बनेंगे. हांगकांग के बाद कनाडा और दक्षिण कोरिया का नंबर आता है 13-13 नए अरबपति बनेंगे. दुनिया के सबसे अमीर देशों में गिने जाने वाले स्विट्जरलैंड का नाम इस सूची में 9वें नंबर पर है. यहां 12 नए अरबपति अगले 10 में बनेंगे. भारत का मित्र देश जापान इस सूची में 10वें नंबर पर है. यहां 11 नए लोग अरबपति बनेंगे.

अफ्रीकन एशियन बैंक की इस रिपोर्ट के बीच ये सोचना भी जरूरी है कि नए अरबपति देश में बनेंगे जरूर लेकिन क्या गरीबी और अमीरी के बीच अंतर कम हो पाएगा. बीते दिनों दावोस में वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम में भारत और चीन जैसे देशों की इस समस्या के बारे में चर्चा हुई थी. कहीं ऐसा न हो कि नए अरबपति तो बन जाएं लेकिन तमाम लोग गरीबी के एक पायदान नीचे चले जाएं.