देश की कुल जीडीपी में 7 फीसदी का योगदान देने वाला ऑटोमोबाइल सेक्टर इन दिनों सुस्ती के दौर से गुजर रहा है. खबरों के मुताबिक अगस्त में ऑटोमोबाइल सेक्टर में 23.5 की गिरावट देखने को मिली. बीते दो दशकों में ये सबसे बड़ी गिरावट है. इसी बीच बजाज ऑटो के मैनेजिंग डॉयरेक्टर राजीव बजाज ने ऑटोमोबाइल सेक्टर की सुस्ती को इंडस्ट्री की खुद की बनाई हुई समस्या बताया है. उन्होंने जीएसटी दरों में कमी की जरूरत से भी इनकार किया है. राजीव का ये बयान तब आया है जब अगले हफ्ते गोवा जीएसटी काउंसिल की बैठक होने वाली है जिसमें जीएसटी दरों में कटौती का एलान हो सकता है.

इकॉनोमिक टाइम्स को दिए गए एक इंटरव्यू में राजीव बजाज ने कहा कि अभी की समस्या जरूरत से ज्यादा उत्पादन से पैदा हुई है. ये उत्पादन कंपनियों ने वृद्धि दर के पूर्वानुमान पर किया जो गलत साबित हुए और ऑटोमोबाइल सेक्टर को ये झटका लगा. उन्होंने कहा, "हम अपना वक्त या पैसा पूर्वानुमानों पर बर्बाद नहीं करते. एक बार उत्पादन पूरा होने पर हम क्षमता बढ़ाने की कोशिश करते हैं." उन्होंने कहा कि कुछ कैटेगरी में ऑटोमोबाइल सेक्टर में जुलाई और अगस्त में लगभग 30 फीसदी की गिरावट हुईं. इनमें से 5 से 7 फीसदी ऐसी गिरावट थी जो आर्थिक कारणों की वजह से थी जिस पर कंपनियों का बहुत कम कंट्रोल होता है. राजीव के मुताबिक अब कंपनियां अपने स्टॉक लेवल को ठीक करने पर काम कर रही हैं और नवंबर तक ये समस्या दूर हो जाएगी.

राजीव ने आर्थिक सुस्ती के चक्र की बात करते हुए कहा, "हर इंडस्ट्री के उठने और गिरने का एक वक्त होता है. कई बार इसे ठीक होने में एक से दो साल लग जाते हैं." ऐसे वक्त में जब ऑटोमोबाइल सेक्टर जीएसटी को 28 से 18 फीसदी करने की बात कहा रहा है, तब राजीव जीएसटी में कमी की जरूरत से साफ इंकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि जीएसटी में कमी से डीलरों का पैसा फंस जाएगा. जो डीलर ज्यादा पैसा देकर कंपनियों से माल खरीद चुकें हैं, उनका नुकसान होगा. राजीव का कहना है जीएसटी कम होने के बाद ग्राहक डीलरों से पुराने जीएसटी दर पर खरीददारी नहीं करेगा जिसका नतीजा भी बुरा होगा. हालांकि वो जीएसटी दरों में मामूली कटौती पर सहमति जताते हैं.

खास बात ये है कि राजीव बजाज की खुद की कंपनी भी आर्थिक सुस्ती से प्रभावित है. देश की तीसरी सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी बजाज ऑटो की अगस्त में 3,90,026 यूनिटों में 11 फीसदी सेल में कमी आई है.