भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल पेमेंट कमेटी बनाई। उद्योगपति नंदन नीलेकणि को इसका चेयरमैन बनाया गया। नीलेकणि इंफोसिस के चेयरमैन और को-फाउंडर रहे हैं। आधार को लागू कराने का श्रेय इन्हीं को मिलता है। वे यूआईडीएआई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और इसे सुरक्षित बनाने के लिए आरबीआई ने मंगलवार को नीलेकणि की अध्यक्षता में पांच सदस्यों वाली कमेटी का गठन किया।

यह समिति देश में कैशलेस भुगतान की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के साथ-साथ डिजिटल भुगतान में वित्तीय समावेश के वर्तमान स्तर का मापेगी. इसके साथ ही आरबीआई ने इस समिति से देशभर में कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के उपाय सुझाने के लिए भी कहा है.कमेटी में नीलेकणि के अलावा पूर्व आरबीआई डिप्टी गवर्नर एच आर खान, विजया बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ किशोर सनसी, आईटी और स्टील मंत्रालय में पूर्व सचिव अरुणा शर्मा और आईआईएम अहदाबाद के चीफ इनोवेशन ऑफिसर संजय जैन शामिल हैं।कमेटी पहली बैठक के 90 दिनों के बाद अपनी पहली रिपोर्ट पेश करेगी

नीलकेणि को पद मिलने के बारे में खास बात ये है की वो कांग्रेस के सदस्य रहे हैं.2014 में वो बेंगलुरू दक्षिण सीट से कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार थे.उम्मीद थी की वो बीजेपी के दिवंगत नेता अनंत कुमार को कड़ी चुनौती देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उन्हें हार का सामना करना पड़ा.नीलकेणि के मामले में एक खास बात ये भी है कि 2014 के समय में ऐसी चर्चाएं थीं की अगर कांग्रेस चुनाव जीती तो हो सकता है की नीलकेणि को प्रधानमंत्री बना दिया जाए.ऐसे में मोदी सरकार के रहते RBI में उन्हें पद मिलना चौंकाता है.

वैसे नीलकेणि को 2006 में विज्ञान और अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है.दुनिया की जानीमानी पत्रिका टाइम मैगजीन ने नीलेकणि को दुनिया के 100 ऐसे लोगों में शामिल किया, जो सबसे ज्यादा प्रेरणादायक थे.