खस्ताहाल होते बैंको और बड़ी कंपनियों के लोन डिफाल्टर होने की खबरों के बीच एक अच्छी खबर आयी है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित हुई एक खबर के अनुसार लगभग 2100 कंपनियों ने बकाया 83000 करोड़ रुपया जमा कराया है।

मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट्स अफेयर्स के हालिया के आंकड़ों का अध्ययन करने से पता लगा की मोदी सरकार के दिवालियापन सम्बन्धी कानून में बदलाव के बाद कंपनियों ने बकाया राशि चुकाने में तेजी दिखाई है।

मोदी सरकार ने दिवालियापन सम्बन्धी कानून में बदलाव करते हुए नॉन परफार्मिंग एसेट्स के प्रोमोटर्स को बिडिंग की प्रक्रिया से बाहर कर दिया है अगर मामला एक बार नेशनल कंपनी ट्रिबूलनाल में चला जाता है।

ऐसे बकाया राशि जिसे 90 दिनों के अंदर वापस न किया जाये उसे नॉन परफार्मिंग एसेट्स में गिना जाता है।

नए कानून के हिसाब से लोन वापसी न करने पर प्रमोटर्स का कंपनी पर किसी भी तरह का मालिकाना हक़ नहीं रहेगा।

इस वजह से बढ़ते सरकारी दवाब और मालिकाना हक़ जाते रहने के भय से कंपनियों ने बकाया राशि चुकाने में तेजी दिखाई है।