सीबीआई की आतंरिक कलह का नतीजा है आरुषि हत्याकांड का अनसुलझा रह जाना?

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Nishant Trivedi Mon, 10/16/2017 - 04:05 CBI, Aarushi murder case

आरूषि तलवार हत्याकांड में इलाहाबाद हाइकोर्ट के ताजा फैसले में डा. राजेश तलवार और नुपुर तलवार को बरी कर दिया गया. इसी के साथ एक बार फिर से हत्याकांड उलझ कर रह गया. हाइकोर्ट के आदेश के बाद इस केस की जांच करन वाली पहली सीबीआई टीम का नेतृत्व करने वाले अरूण कुमार ने कहा कि कोर्ट में जांच के बाद सेलेक्टिव एविडेंस पेश किए गए. आपको बता दें कि अरूण कुमार की नेतृत्व वाली सीबीआई टीम ने जांच में डा. तलवार के तीन नौकरों को दोहरे हत्याकांड का दोषी पाया था हालांकि बाद में सीबीआई जांच में डा. तलवार और उनकी पत्नी को ही दोषी पाया गया जिसके बाद सीबाआई कोर्ट ने तलवार दंपति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
अरूण कुमार ने हाइकोर्ट के आदेश के बाद ये भी कहा कि ये वो समय है जब हमें एक दूसरे पर इल्जाम लगाने के बजाय ये सुनिश्चित करने के बारे में विचार करना चाहिए की जो तलवार दंपति के साथ हुआ वो दूसरे किसी के साथ न हो. अरूण कुमार उत्तर प्रदेश कैडर के 1985 बैच के आईपीएस ऑफिसर हैं. आरूषि हत्याकांड के समय में वो सीबीआई में संयुक्त निदेशक पद पर तैनात थे. कुमार को विशेष तौर पर सीबीआई जांच के लिए 100 दिन के लिए नोयडा भेजा गया था.
दरअसल अरूण कुमार के लिए ये कोई पहला केस नहीं था. इससे पहले भी वो कई बड़े मामलों की जांच कर चुके थे और उनमें उन्हें जो सफलता मिली उसे देखते हुए ही इस मामले की जांच करने का भार उन्हें दिया गया था. दरअसल अरुण कुमार ने भारतीय इतिहास के सबसे घोटालों में से एक फर्जी स्टॉप पेपर घोटाले का खुलासा किया था. अरूण की जांच रिपोर्ट के बाद ही घोटाले के मुख्य आरोपी अब्दुल करीम तेलगी को लंबी सजा और बड़े जुर्मानें का दंड दिया गया था.

आरूषि तलवार हत्याकांड मामले में पुलिस की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद सीबाआई को ये जांच सौंपी गई थी. अरूण कुमार के नेतृत्व वाली टीम ने तलवार दंपति को क्लीन चिट देते हुए 3 नौकरों को दोहरे हत्याकांड का दोषी पाया था. हालांकि अरूण कुमार की टीम की जांच को सीबीआई के तत्कालीन  निर्देशक रहे अश्विनी कुमार ने नकार दिया. इसके बाद इस केस  में चार्जशीट फाइल नहीं हो सकी और तीनों आरोपी जेल से निकलने में कामयाब रहे.
अरूण कुमार के बाद इस केस की जांच दूसरी सीबाआई टीम ने की. इस टीम का नेतृत्व एजीएल कौल कर रहे थे. कौल की टीम ने जांच में वही नतीजा निकाला जो यूपी पुलिस पहले ही निकाल चुकी थी. उन्होंने यूपी पुलिस के निकाले गए सेक्स एगंल को सही मानते हुए आरूषि के माता पिता को इस मामले में मेन अभियुक्त बताया.
‘आरूषि’ नाम की किताब लिखने वाले पत्रकार अविरूक सेन ने इस किताब में कुछ चौकाने वाले खुलासे किए थे. वो आरूषि में लिखते हैं कि सीबीआई में अरूण कुमार और कौल के रिश्तों में काफी खटास रहती थी. किताब के अनुसार अरूण कुमार सीबीआई में कौल के सीनियर हुआ करते थे और उन्होंने कौल को कुछ गलत कामों में लिप्त पाया था. दरअसल अरूण कुमार को इस बात की सूचना मिली थी कि कौल ने दहेज हत्या के कुछ आरोपियों से घूस ली थी.
इसके बाद अरूण कुमार ने उन्हें संदिग्ध ईमानदारी रखने वाले सीबीआई ऑफिसर्स की लिस्ट में डाल दिया था. किताब में अविरूक ये सवाल भी खड़ा करते हैं कि आखिर क्यों अरूण ने तब कौल को नौकरी से बर्खास्त नहीं किया. हालांकि अविरूक खुद इस बात का जवाब भी देते हैं कि कौल जैसे लोगों के लिए न केवल कानून एक विकल्प होता है बल्कि एजेंसी के भी कुछ लोग उनकी मदद करते हैं.
अविरूक ये भी लिखते हैं कौल से नाराज होकर होने के कारण ही अरूण उन्हें बहुत कम मामलों में जांच का काम देते थे. हालांकि निठारी कांड में दोनों ने साथ काम किया था.
अरूण कुमार ने आरूषि तलवार केस से जुड़े हुए कई इंटरव्यू टीवी पर दिए और खुलकर अपनी बात रखी. एनडीटीवी को दिए गए एक इंटरव्यू में अरूण कुमार ने फिल्म तलवार में इरफान खान के निभाए गए रोल को अपने काफी करीब बताया था और कहा था कि कुछ चीजों को अगर छोड़ दें तो इरफान का किरदार काफी कुछ उनके जैसा है.
अरूण कुमार अभी बीएसएफ में तैनात हैं.

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